ट्रेन में लुट गये सबर मजदूर

मुसाबनी : गलुरु से कमा कर अपने परिवार के साथ ट्रेन से वापस आ रहे डुमरिया दासोडीह-राजाबासा टोला के सबर मजदूरों को विशाखापट्टनम में लुटेरों ने लूट लिया. शिकार बने सभी भूखे-प्यासे बिना टिकट के ही अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ टाटा स्टेशन पहुंचे. यहां से पैदल ही अपने घर के लिए रवाना हो […]

मुसाबनी : गलुरु से कमा कर अपने परिवार के साथ ट्रेन से वापस आ रहे डुमरिया दासोडीह-राजाबासा टोला के सबर मजदूरों को विशाखापट्टनम में लुटेरों ने लूट लिया. शिकार बने सभी भूखे-प्यासे बिना टिकट के ही अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ टाटा स्टेशन पहुंचे.
यहां से पैदल ही अपने घर के लिए रवाना हो गये. नरवा के पास पहुंचे, तो मुसाबनी वापस लौट रहे टेंपो चालक गोपाल हो की नजर उन पर पड़ी. गोपाल को इन सबरों पर तरस आ गयी.
उसने मानवता दिखायी और अपने टेंपो में बैठने को कहा. सबरों ने कहा कि उनके पास पैसे नहीं है. सो पैदल ही डुमरिया जायेंगे. गोपाल ने उन्हें अपने टेंपो पर बैठाया और कहा कि पैसे नहीं लगेंगे. उसने सभी को अपने टेंपो से मुसाबनी लाया और भूखे-प्यासे सबरों को खाना खिलाया. आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष सिदो मार्डी ने इनको मुसाबनी से घर जाने के लिए रुपये दिये.
मामला कुछ ऐसा है. राजाबासा के राम सबर, भूतनाथ सबर, राज कुमार सबर, लखन सबर, सोमवारी सबर, फूलमनी सबर अपने बच्चों के साथ चार माह बेंगलुरु में मजदूरी करने गये थे. वहां से कमा कर ट्रेन से घर लौट रहे थे.
विशाखापट्टनम के पास कुछ बदमाशों ने ट्रेन में उनके साथ लूटपाट की और टिकट भी ले लिया और ट्रेन से भी उतार दिया. यहां से किसी दूसरे ट्रेन से भूखे-प्यासे और बिना टिकट के ही सभी टाटा आये. यहां से डुमरिया के लिए पैदल चल दिया. सबर महिलाएं अपनी गोद में बच्चों को लेकर पैदल ही डुमरिया आ रही थी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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