गालूडीह : जमशेदपुर प्रखंड की दलदली पंचायत के बूढ़ाबूढ़ी पहाड़ की तलहटी में बसे सुकलाड़ा सबर बस्ती के सबर पहाड़ों के भूत बने हैं. यहां कभी 30 से अधिक सबर परिवार रहते थे, परंतु बीमारी और गरीबी से कई सबरों की मौत हो गयी. यहां के दो टोलों में अब सिर्फ 15 सबर परिवार हैं. जजर्र और जानलेवा इंदिरा आवास में रहते हैं. सभी जंगलों के भरोसे जी रहे हैं. जंगल ही इनकी आय का श्रोत है.
यहां के सबर सुबह होते ही जंगल में चले जाते हैं. पत्ता, लकड़ी आदि लेकर शाम में लौटते हैं. इनकी जिंदगी जंगल से शुरू होकर जंगल में ही खत्म हो जाती है. लकड़ी, पत्ता, दतवन, जड़ी-बूटी बेच कर सबर पेट पाल रहे हैं. यहां कभी कोई प्रशासनिक पदाधिकारी सुधि लेने नहीं आया. जनप्रतिनिधि भी यहां नहीं आये.
कई सबर परिवार का मिटा अस्तित्व
यहां के चुनू सबर, बोड़ोमुड़िया सबर, धोसड़ा सबर, सुदू सबर, गुरुचरण सबर, डोबरा सबर, लेदा सबर, जटल सबर, सुकला सबर समेत कई सबर परिवारों का अस्तित्व ही मिट गया है. गांव के बुजुर्ग कालीपद सबर ने कहा कि कई सबर परिवारों के सभी सदस्य मारे जा चुके हैं. यहां कई इंदिरा आवास विरान है.
फिलहाल यहां के 15 परिवारों में कालीपद सबर, निरोध सबर, महेंद्र सबर, दीपक सबर, बुढ़ा सबर, मलिंद्र सबर, उपेंद्र सबर, प्रफुल्ल सबर, धीरेन सबर, वीरेण सबर, सारथी सबर, सुकू सबर, जगन्नाथ सबर, सोनू सबर, छुटू सबर हैं.
