गांडेय : वैसे तो स्वच्छ भारत अभियान व खुले में शौच से मुक्ति को लेकर प्रखंड में बड़े ही तामझाम के साथ रैली व अन्य कार्यक्रम किये गये, लेकिन हकीकत में जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिखा.
वर्तमान में स्थिति ऐसी है कि प्रखंड के 80 प्रतिशत परिवार के लिए अभी तक एक शौचालय की व्यवस्था नहीं हो पायी है. शौचालय नहीं रहने से लोग खुले में शौच को विवश हैं.साथ ही जहां -तहां गंदगी बिखरी पड़ी रहती है. साफ -सफाई पर फिर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
पानी के अभाव में शौचालय पड़ा है बेकार : हाल के दिनों में ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रखंड मुख्यालय में साफ-सफाई का दौर चला. इस कड़ी में प्रशासनिक अधिकारी से लेकर कई जनप्रतिनिधियों ने हाथ में झाड़ू पकड़ कर अभियान की शुरुआत की. लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा. प्रखंड परिसर स्थित शौचालय देखरेख के अभाव में बेकार हो गया है.
पानी के अभाव में प्रखंड कार्यालय का शौचालय भी चालू नहीं हो पाया है. प्रखंड परिसर का शौचालय तो एक बानगी है. कुछ पंचायतों में पीएचइडी के तहत शौचालय निर्माण शुरू भी हुआ है. परंतु राशि के अभाव में काम अधूरा पड़ा है.
