खबर छपने के बाद पुलिस ने ऐजेंटों पर बनाया दवाब
गालूडीह : गालूडीह थाना क्षेत्र के देवली और निश्ंिचतपुर के 13 मजदूरों के आंध्रप्रदेश में बंधक बनने से संबंधित खबर 13 मई को प्रभात खबर में छपने पर प्रशासन जागा और मजदूरों को ले जाने एजेंटों में हड़कंप मचा. मजदूरों के परिजन थाना गये और एजेंटों पर प्राथमिकी दर्ज कराने की धमकी दी.
पुलिसिया और ग्रामीणों के दबाव के कारण एजेंट दयाल गोराई और सपन गोराई ने बंधक बने मजदूरों में से सात को छुड़ाया. शनिवार को साथ मजदूर सुजीत पात्र, योगेश्वर पात्र, लखीचरण पात्र, विशाल कर्मकार, विक्रम हांसदा, धनंजय हेंब्रम और गौर पात्र गांव पहुंचे. छह मजदूर शांखो हांसदा, बास्ता हेंब्रम, कार्तिक पात्र, नेछु आचार्य, लालटू सिंह और विशाल हेंब्रम अब वहीं हैं. एजेंटों ने कहा कि जल्द ही उक्त मजदूरों को गांव पहुंचा देंगे.
मजदूरों ने सुनाई आपबीती
सात मजदूरों ने आपबीती सुनायी. कहा कि 20 फरवरी को यहां से एजेंट दयाल और सपन गोराई के साथ बोरिंग गाड़ी में मजदूरी करने 7,500 मजदूरी देने की बात पर गये थे. वहां ब्रीन वोर बेल नामक कंपनी में काम करते थे.
वहां पहुंचे तो सात हजार देने की बात हुई. 24 घंटे काम लियाजाता था. सोने नहीं दिया जाता था. जेब खर्च के लिए पैसे नहीं देते थे.
भोजन मिलता था. मोबाइल छिन लिया गया था. घर पर बात करने नहीं दिया जाता था. हम शौच जाने का बहाना बना कर मोबाइल से बात करते थे. मारपीट भी की गयी थी. आते समय मजदूरी दी गयी. प्रति मजदूरों से सात हजार कर मजदूरी की राशि काट कर रख ली गयी.
एजेंटों को 15 दिनों का समय दिया गया था
‘‘सात मजदूर गांव लौटे हैं. एजेंटों को 15 दिनों का समय दिया गया था. मजदूरों को नहीं लाने पर प्राथमिकी दर्ज कराने की धमकी दी गयी थी. भय से एजेंटों ने बंधक बने मजदूरों छुड़ाया. सात मजदूर गांव लौटे. शेष छह मजदूरों को जल्द गांव पहुंचाने की बात कही गयी है.
वकील हेंब्रम, मुखिया, उलदा पंचायत
