चाकुलिया में बेची गयी सबर बच्ची बरामद
झारखंड में सबर (आदिम जनजाति) का अस्तित्व खतरे में है. आदिवासी बहुल इस झारखंड की सिर्फ एक छोटी सी बस्ती (गालूडीह के पास) में पांच साल में 23 सबरों की मौत हो गयी जबकि बस्ती की कुल आबादी ही 55 की थी.
सबरों की आर्थिक स्थिति कितनी खराब है, इसका एक और उदाहरण चाकुलिया में मिला. फुलमनी नामक वृद्धा ने अपनी दो माह की पोती को इसलिए बेच दिया क्योंकि उसके पास पोती को पालने के लिए पैसे नहीं थे. खुद तो भीख कर पेट भरती है, पोती को कहां से पालती. उस बच्ची का पिता जेल में है.
प्रभात खबर में रिपोर्ट छपी और प्रशासन चौकस हुआ. गालूडीह टीम पहुंची. उधर उस बेची गयी बच्ची को भी बरामद कर उसे उसके फुआ को सौंप दिया गया. लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है.
ये दो घटनाएं बताती हैं कि झारखंड की लगभग आठ आदिम जनजाति के 2,92,359 सदस्यों का क्या हाल है. पूरे राज्य में सिर्फ 9688 सबर (आंकड़े टीआरआइ के) हैं. सरकार आदिम जनजाति के लिए योजनाएं चलाती हैं, फिर भी इनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. 14 साल तक आदिवासी मुख्यमंत्रियों ने ही राज किया लेकिन इन आदिम जनजाति की स्थिति में बदलाव नहीं दिखा. इन पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाये गये. कहां गया वह पैसा? यह आदिम जनजाति आर्थिक और राजनीतिक तौर पर भी काफी पिछड़ी हुई है.
इनकी आबादी इतनी कम है कि उनके वोट से कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता. जिस जाति-समुदाय की आबादी ज्यादा है, सरकार-राजनीतिक दल उसी की परवाह करते हैं. यही कारण है कि आदिम जनजाति लगातार पिछड़ती जा रही है. उन पर किसी का ध्यान नहीं होता. अगर अब भी इन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आनेवाले दिनों में इनका अस्तित्व खत्म हो सकता है.
चाकुलिया : ‘लाचार सबर वृद्धा फुलमनी ने दो माह की पोती को बेच दिया’ शीर्षक से संबंधित समाचार सोमवार को प्रभात खबर में छपने के बाद प्रशासन हरकत में आया. प्रशासनिक पदाधिकारियों ने सबर बच्ची को चाकुलिया के नया बाजार स्थित रेलवे लाइन के किनारे बसी बस्ती से बरामद कर लिया. बच्ची को उसकी फुआ संधी सबर के हवाले कर दिया गया. अब बच्ची के पालन पोषण के लिए सरकारी सुविधा मिलेगी.
जानकारी के अनुसार सोमवार को जिला आपूर्ति पदाधिकारी दिलीप कुमार तिवारी, घाटशिला के एसडीओ गिरिजा शंकर प्रसाद, चाकुलिया के बीडीओ गिरिजा शंकर महतो, सीओ गणोश महतो, थाना प्रभारी बिक्रमा राम सुनसुनिया के सबर बस्ती पहुंचे. यहां फुलमनी सबर से मिले और बच्ची के बारे में पूछताछ की. सबर वृद्धा ने बताया कि बच्ची को चाकुलिया में किसी को दे दिया है. अधिकारियों ने वृद्धा से पूछा कि वह घर दिखा सकती है, जहां बच्ची को दी है.
वृद्धा ने कहा कि वह घर दिखा सकती है. इसके बाद उसे साथ लेकर पदाधिकारी चाकुलिया पहुंचे. वृद्धा ने रेलवे लाइन के किनारे बसी बस्ती में घर दिखाया. जिस घर को वृद्धा ने दिखाया, उस घर में अजय बेहरा अपनी पत्नी पूजा बेहरा के साथ रहते हैं. सबर बच्ची इनके पास से मिली. दंपती ने बताया कि बच्ची को खरीदा नहीं था. वृद्धा पालने के लिए बच्ची को दे गयी थी. यही बात फुलमनी सबर ने भी अधिकारियों को बताया.
वृद्धा और बच्ची को लेकर पदाधिकारी सुनसुनिया पहुंचे. बच्ची को उसकी फुआ संधी सबर के हवाले कर दिया गया. एसडीओ ने बच्ची के दूध के लिए पांच सौ रुपये दिये. संधी सबर ने कहा कि वह अपने भाई की एक बेटी को पाल रही है. इसे भी पालेगी. सीडीपीओ श्वेता भारती को दोनों बच्चियों के लिए विशेष पोषाहार देने का आदेश दिया गया.
सबर जाति को मुंडारी भाषा परिवार से जोड़ा गया है : डॉ गया
रांची : रांची विवि स्नातकोत्तर मानवशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ गया पांडेय ने कहा है कि नौ आदिम जनजाति में सबर भी एक जाति है. सबर व हिल खारिया अब एक जाति में शामिल हो गये हैं.
मुंडारी व द्रविड़ भाषा में सबर को मुंडारी भाषा परिवार से जोड़ा गया है. आज इसकी संख्या घट रही है. रांची विवि में इस जनजाति के ऊपर शोध हो रहे हैं. वर्ष 1962 में नर्मदेश्वर प्रसाद की पुस्तक लैंड एंड पिपुल ट्राइबल बिहार में इस जाति का जिक्र किया गया है.
बच्ची को उसकी फुआ के हवाले कर दिया गया. आंगनबाड़ी केंद्र से दोनों बच्चियों के लिए विशेष तौर पर पोषाहार दिया जायेगा. सीडीपीओ को आदेश दिया गया है. सेविका इन बच्चियों की समय-समय पर निगरानी करती रहेगी
गिरिजा शंकर प्रसाद
एसडीओ, घाटशिला
