बासुकिनाथ. तालझारी वासंती दुर्गामंदिर परिसर में विश्व कल्याणार्थ शतचंडी महायज्ञ में लोगों की भीड़ लग रही है. सभी सदस्यों व यजमानों ने गणपति पूजन किया. इसके उपरांत भव्य यज्ञशाला में बने पांच हवन कुंड में यजमानों ने घी सामग्री से आहुतियां डालकर मंगल कामना की. विद्वान ब्राह्मणों ने मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ में आहुति दी. आरती के उपरांत परिक्रमा की गयी. हवनकुंड में आहुति देकर यज्ञ मंडप की भक्तों ने परिक्रमा की. कथावाचक आचार्य अवधेश शास्त्री ने कहा कि भगवान को निर्मल मन से भक्ति करने वाले भक्त बहुत ही प्रिय होते हैं. छल और कपट करने वालों को परमात्मा की कृपा नहीं मिलती है. इस संसार में परमात्मा की शरण ही सच्ची शरण है. उन्होंने कहा कि इस संसार में जो भी होता है, वह परमात्मा की शरण से ही होता है. कथा में उन्होंने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग का बड़ा ही मनोहारी वर्णन किया. शास्त्री ने कहा कि भगवान की भक्ति मोह के वशीभूत होकर नहीं करनी चाहिए. साधना के पथ पर कठिनाइयां आती हैं, परंतु जो भी साधक भक्ति के पथ पर जाते हैं उनके जीवन की सभी कठिनाइयां दूर होती हैं. उन्होंने कहा कि संत के क्षण और अन्न के कण भाग्यवान मनुष्य को ही मिलते हैं. भगवान के चरणों में समर्पण से आनंद की प्राप्ति होती है. महायज्ञ के सफल संचालन में यज्ञ समिति के पूर्व प्रमुख लखीनारायण दत्ता, मांगन प्रसाद राव, अनूप कुमार, महेंद्र झा, रतन बिहारी, सुबोध दत्ता, अशोक झा, जवाहर झा, छवि झा, गौरीशंकर पांडेय, बालकृष्ण पांडेय, महेश कुमार साह, अनूप कुमार झा सहित दर्जनों सदस्य लगे हुए हैं.
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