दुमका (आनंद जायसवाल). संताल परगना के छात्रों को कानून की पढ़ाई करने के लिए इस प्रमंडल से बाहर जाने की मजबूरी पैदा हो गयी है. इसकी वजह सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के अंतर्गत दो महाविद्यालयों में लॉ की पढ़ाई का बंद हो जाना है. पिछले चार सत्र से इन दोनों लॉ कॉलेजों में कोई दाखिला नहीं हुआ है. फिलहाल इन दोनों ही कॉलेजों में केवल अंतिम सेमेस्टर के छात्र ही बचे हैं, जिनकी परीक्षा होते ही पूरे कॉलेज में ताला लटक जाएगा. इन दोनों ही लॉ कालेज में वर्ष 2009-12 के लिए प्रारंभिक दौर में मान्यता प्रदान की गयी. उसके बाद एक-एक साल के लिए इन लाॅ कॉलेज को मान्यता बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मिलती रही. लेकिन साल 2013 में इस लॉ कॉलेज को बार काउंसिल से मान्यता नहीं मिल सकी थी और एक साल का ब्रेक इस संस्थान में लग गया था. यानी सत्र 2013-16 में इन दोनों ही कॉलेजों में छात्रों का दाखिला नहीं हो पाया था. उस वक्त प्रभात खबर ने इस मुद्दे को व कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही को प्रमुखता से उजागर किया था, तब विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहल की थी और अगले सत्र यानी 2014-17 के लिए बार काउंसिल से मान्यता दिलाने के प्रयास में सफल रही थी. मिली जानकारी के मुताबिक अब पिछले चार सत्र 2021, 2022, 2023 एवं 2024 में इन दोनों ही लॉ कॉलेज क्रमश: एसपी लॉ कालेज एवं देवघर लॉ कालेज में बार काउंसिल ऑफ इंडिया से संबंधन व मान्यता के अभाव में दाखिला नहीं लिया जा सका है.
यह है बड़ी वजह : कॉलेज ने फीस भेज दिया, डॉक्यूमेंट नहीं :
दरअसल एसपी लॉ कालेज एवं देवघर लॉ कॉलेज की ओर से लगभग साढ़े तीन-साढ़े तीन लाख रुपये की फीस बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेज दिये गये. इसके लिए ड्राफ्ट बनवाया गया, पर उसके साथ जो दस्तावेज बार काउंसिल ऑफ इंडिया को देने थे, वह कोई दस्तावेज संलग्न नहीं किया गया. ऐसे में मान्यता का सवाल ही नहीं उठता था. कॉलेजों की अपनी लापरवाही से मामला अटक गया था.
30 बिंदुओं पर देनी थी जानकारी :
बताया जा रहा है कि लॉ कालेजों को 30 बिंदुओं पर जानकारी देनी थी. शपथपत्र के साथ किसी एक बिंदु पर कॉलेज की ओर से जानकारी नहीं दी गयी थी. कक्षा संचालन की विडियोग्राफी-फोटोग्राफी तक भी अटैच करना था. कैंपस-लाइब्रेरी के ब्यौरे भी देने थे. जो क्लास्म दिये भी गये थे, उसे वापस ले लिया गया था. अगर सबकुछ सही-सही होता तो कॉलेज बंद नहीं होता.आधारभूत संरचना नहीं :
दोनों ही कालेजों में लॉ के लिए कोई आधारभूत संरचना नहीं है. जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक एसपी कॉलेज के ही कुछ कमरों को लॉ कॉलेज का कमरा दिखाया गया है. यही हाल देवघर में भी है. कायदे से लॉ कॉलेज के नाम पर भवन व तमाम आधारभूत संरचनाएं होनी चाहिए. वह सुविधाएं विकसित नहीं हो पायी हैं.स्थायी फैकल्टी भी नहीं :
इन लॉ कालेजों में स्थायी फैकल्टी भी नहीं हैं. एसपी लॉ कॉलेज के फैकल्टी को कॉलेज प्रबंधन की ओर से 200 रुपये प्रति घंटी के हिसाब से मानदेय दिया जाता है, जबकि प्रावधान के तहत उन्हें 57700 रुपये का भुगतान देना है और मान्यता के लिए उनकी सैलेरी स्लीप भी देनी है. बैंक स्टेटमेंट भी देना है.शपथपत्र का भी नहीं हुआ अनुपालन :
एसपी लॉ कॉलेज और देवघर लॉ कॉलेज की ओर से बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पूर्व में जो शपथ पत्र दिया गया था, उन शपथ पत्रों के अनुरूप संस्थान अपने संकल्प-शपथ को पूरा नहीं कर सकी है. कहा गया था बार काउंसिल ऑफ इंडिया की शर्तों के अनुरूप फैकल्टी की नियुक्ति कर ली जाएगी. तीन महीने के अंदर भवन बनवा लिया जाएगा और पुस्तकों की खरीद भी हो जाएगी.
इस बजट में राज्य सरकार ने दुमका में लॉ कालेज खोलने का किया है ऐलान :
झारखंड सरकार के वर्ष 2025 के बजट में वित्तमंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कानून की पढ़ाई के लिए पूरे राज्य में पांच जिलों में नये संस्थान प्रारंभ करने का ऐलान किया है. इनमें से रांची, हजारीबाग, धनबाद और पलामू के अलावा अपना दुमका जिला भी है. यह बात दीगर है कि सरकारी स्तर पर विधि महाविद्यालय को प्रारंभ कराने की पहल होती भी है, तो इसके लिए आधारभूत संरचना लगभग तैयार भी हो रहा है. सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में लॉ की पढ़ाई के लिए बहुमंजिला भवन लगभग बनने की स्थिति में है. भवन का स्ट्रक्चर तैयार कर लिया गया है, अब उसमें पुट्टी आदि का काम चल रहा है. सबकुछ सही रहा, तो अप्रैल-मई में भवन को हैंडओवर कराया जा सकता है. सरकार ने संवेदनशीलता दिखायी और मान्यता आदि के लिए पहल की, तो पठन-पाठन भी सत्र 2025 से प्रारंभ कराने की पहल हो सकती है.मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी रहे हैं लॉ की पढ़ाई को लेकर गंभीर :
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी संताल परगना खासकर दुमका में लॉ की पढ़ाई को लेकर गंभीर रहे हैं. यही वजह रही है कि जब लॉ में यहां दाखिला बंद हो गया, तो संताल परगना के गरीब बच्चों के कानून की पढ़ाई का सपना भी टूटने-बिखरने लगा. शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची, तो उन्होंने सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के शीर्ष पदाधिकारी से भी तब बात की थी. बावजूद इन चार साल में विश्वविद्यालय स्तर से पहल नहीं की जा सकी. वर्तमान में प्रभारी कुलपति प्रोफेसर बिमल प्रसाद सिंह की लगातार कोशिश है कि लॉ सहित अन्य भवनों का निर्माण पूरा हो, ताकि संबंधित कोर्स बिना किसी बाधा के विवि कैम्पस के अंदर ही चालू करा दिया जाए, जिससे कि पूरे संताल परगना के छात्र लाभान्वित हों और उन्हें पढ़ाई के लिए बाहर न जाना पड़े.
क्या कहते हैं एसपी काॅलेज के प्राचार्य :
एसपी लॉ काॅलेज की ओर से संबंधन विस्तार के लिए साढ़े तीन लाख रुपये का निर्धारित शुल्क बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजा गया है. पत्राचार भी किया गया है. लेकिन उसके बाद से संबंधन विस्तार को लेकर पहल नहीं हुई है.– डॉ खिरोधर प्रसाद यादव, प्रभारी प्राचार्यB
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
