Jharkhand Divas (दुमका): झारखंड मुक्ति मोर्चा के 47वें झारखंड दिवस को लेकर उपराजधानी पार्टी के हॉर्डिंग, झंडे और बैनरों से पट गई है. सोमवार 2 फरवरी को दिन के दो बजे एसपी कालेज से रैली निकाली जायेगी, जो सिदो कान्हू पोखरा चौक, टीन बाजार, मेन रोड होते हुए गांधी मैदान पहुंचेगी. सभा को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा पार्टी के कई नेता संबोधित करेंगे. गांधी मैदान में मंच को इस बार बड़ा आकर दिया गया है. मुख्य मंच के बगल में एक और मंच बनाया गया है. गांधी मैदान में देर शाम सभा की शुरुआत परंपरा के मुताबिक शहीदों को श्रद्धांजलि देने और पार्टी का झंडा फहराने से होगी. आधी रात के बाद तक यह आयोजन चलता रहता है. आयोजन के लिए पूरे रास्ते में विद्युत सजावट की गयी है. इस बार दिशोम गुरु शिबू सोरेन के कट आउट जगह-जगह लगाये गये हैं.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
मुख्यमंत्री हेमंत के साथ-साथ अन्य वीआइपी के आगमन को देखते हुए डीसी अभिजीत सिन्हा, एसपी पीतांबर सिंह खेरवार तमाम अधिकारियों के साथ सुरक्षा सहित विधि-व्यवस्था का जायजा लेने गांधी मैदान पहुंचे और आवश्यक दिशा-निर्देश दिया. एसपी श्री खेरवार ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मुख्यालय से भी पुलिस बल मंगवाया गया है. काफी अधिक भीड़ जुटने की संभावना को देख सात डीएसपी समेत कई पुलिस पदाधिकारी-जवानों की तैनाती की गयी है. जगह-जगह दंडाधिकारी भी तैनात रहेंगे.
दुमका में मनता है झारखंड दिवस, धनबाद में 4 फरवरी को स्थापना दिवस
झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन चार फरवरी 1973 को धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में सोनोत संताल समाज के नेता शिबू सोरेन, शिवाजी समाज के संस्थापक बिनोद बिहारी महतो व प्रखर मार्क्सवादी चिंतक एके राय की अगुवाई में हुआ था. इसलिए झारखंड मुक्ति मोर्चा अपनी पार्टी का स्थापना दिवस धनबाद में मनाती है, पर पार्टी के स्थापना के बाद अलग झारखंड राज्य के लिए पहली संकल्प सभा दुमका में 1977 में एसपी कालेज के मैदान में हुई और उसके अगले साल से पार्टी ने संताल परगना के इस जिला मुख्यालय में झारखंड दिवस मनाने की परंपरा स्थापित की. साल दर साल इस आयोजन ने संताल परगना ही नहीं छोटानागपुर प्रमंडल में झामुमो को इस कदर मजबूत किया कि इस आंदोलन के आगे केंद्र की सरकार को झुकना पड़ा और अलग झारखंड राज्य के प्रस्ताव को पारित करना पड़ा.
भीड़ के लिए लगाए गए बड़े-बड़े स्क्रीन
जब अलग राज्य के रूप में झारखंड 15 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आ गया, तब भी झामुमो ने अपने इस सालाना जलसे को मनाना बंद नहीं किया, क्योंकि यही सभा झारखंड मुक्ति मोर्चा को दूसरे राजनीतिक दलों से अलग बनाती थी. अलग राज्य मिलने के बाद भी झामुमो ने इस राज्य को संवारने-सजाने और झारखंडियों के हक के लिए आवाज बुलंद करती रही है. चाहे पार्टी सत्ता में या विपक्ष की भूमिका में, जनमुद्दों व क्षेत्र की जन अपेक्षाओं के अनुरूप मंच से संवाद का सिलसिला आज भी कायम है. बता दें कि झामुमो के इस आयोजन के लिए गांधी मैदान हर साल छोटा पड़ जाता है, इसलिए न केवल मैदान पर जगह-जगह बल्कि मैदान से बाहर शहर के प्रमुख चौराहे पर भी बड़े-बड़े स्क्रीन लगवा दिये जाते हैं, ताकि जिन्हें गांधी मैदान में पैर रखने की जगह न मिले, वे कम से कम मैदान के बाहर रहकर भी अपने नेता का संदेश सुन सके और इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का गवाह बन सकें.
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