प्रतिनिधि, सरैयाहाट. प्रखंड क्षेत्र के टोल टैक्स से जमुआ गांव को जोड़ने वाली कच्ची सड़क की स्थिति दिनों-दिन बदतर होती जा रही है. बरसात शुरू होते ही सड़क कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो गयी है. स्थिति यह है कि छोटे वाहनों की बात तो दूर, ट्रैक्टर-ट्रॉली तक रास्ते में फंस जा रहे हैं. इससे ग्रामीणों को आवागमन के साथ-साथ रोजमर्रा के कामकाज में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
कीचड़ में फंसा ट्रैक्टर, पलटने से सीमेंट हुआ बर्बाद
सड़क की बदहाली का अंदाजा सोमवार को हुई घटना से लगाया जा सकता है. सीमेंट लदा एक ट्रैक्टर सड़क पर कीचड़ में फंसकर पलट गया. हादसे के बाद ट्रैक्टर पर लदा पूरा सीमेंट पानी में बहकर बर्बाद हो गया. इससे संबंधित लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में सड़क की यही स्थिति होती है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी है.
वर्षों से उपेक्षित है सड़क, पक्कीकरण का इंतजार
ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क वर्षों से उपेक्षित पड़ी है. आजादी के इतने वर्षों बाद भी सड़क का पक्कीकरण नहीं हो सका है. बरसात में सड़क दलदल में बदल जाती है और कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं. ऐसे में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है.
ग्रामीणों ने कहा कि सड़क की बदहाली स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को दर्शाती है. लोगों ने अविलंब सड़क का पक्कीकरण कराने की मांग की है.
किसानों को उपज लाने-ले जाने में परेशानी
मुरारी यादव ने कहा, "टोल टैक्स से गांव तक आने वाली सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. बरसात में यह सड़क दलदल बन जाती है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है."
मनोज यादव ने कहा, "हम किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है. खेत से उपज लाने में दिक्कत होती है. ट्रैक्टर-ट्रॉली तक रास्ते में फंस जाती है, जिससे समय और पैसा दोनों का नुकसान होता है."
बीमार पड़ने पर खाट या कंधे का सहारा
जोतिन परैया ने कहा, "अगर घर में कोई बीमार पड़ जाए तो सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है. एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. मरीज को कंधे या खाट पर ले जाना पड़ता है."
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की खराब स्थिति के कारण आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है. इससे लोगों में हमेशा चिंता बनी रहती है.
बाइक चलाना भी जोखिम भरा, बच्चे स्कूल जाने से परेशान
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की हालत इतनी खराब हो गयी है कि बाइक चलाना भी जोखिम भरा हो गया है. कीचड़ और फिसलन के कारण आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं.
गौतम कुमार यादव ने कहा, "बरसात के समय बच्चों को स्कूल भेजना बहुत मुश्किल हो जाता है. रास्ते में कीचड़ और पानी भरा रहता है. कई बार बच्चे रास्ते की स्थिति देखकर वापस घर लौट जाते हैं."
जल्द पहल नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क का अविलंब पक्कीकरण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि सड़क निर्माण नहीं होने से गांव के लोगों को लंबे समय से परेशानी झेलनी पड़ रही है. यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस पहल नहीं की गयी, तो ग्रामीण आंदोलन करने को बाध्य होंगे.
