अधिनियम में संशोधन प्रस्ताव को अविलंब खारिज करने की मांग
दुमका : राष्ट्रीय विधि आयोग की अनुशंसा पर अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन किये जाने के विरोध में शुक्रवार को ऑल इंडिया बार काउंसिल और झारखंड स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर दुमका जिला अधिवक्ता संघ के सदस्यों ने न्यायिक कार्यों से अपने को अलग रखा. जिला अधिवक्ता संघ ने राष्ट्रीय विधि आयोग की अनुशंसा पर केन्द्र सरकार द्वारा अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन प्रस्ताव को अविलंब खारिज करने की मांग की. संघ के महासचिव राघवेन्द्र नाथ पांडेय ने बताया कि अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन के विरोध में ऑल इंडिया बार कौंसिल के आह्वान आज आहूत एक दिवसीय कार्य बहिष्कार आंदोलन पूर्ण सफल रहा.
उन्होंने कहा कि विधि आयोग द्वारा तैयार संशोधन प्रस्ताव पर दुमका सहित पूरे देश के अधिवक्ता एकजुट हैं. बार काउंसिल द्वारा इस मसले पर भविष्य में भी आहूत कार्यक्रम को सफल बनाया जायेगा. झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य सह वरीय अधिवक्ता गोपेश्वर प्रसाद झा ने विधि आयोग की अनुशंसा को तुगलकी फरमान करार देते हुए केन्द्र सरकार से इसे अविलम्ब खारिज करने की मांग की. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार गरीबों को न्याय दिलाने के लिए लड़नेवाले अधिवक्ताओं पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है.
कहा कि आजादी के पूर्व से अधिवक्ता समाज गरीब और बेसहारा को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं. जरूरत पड़ने पर वे न्यायालय के बाहर सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन करते रहे हैं और समाज को नयी दिशा दिखाने का काम करते रहे है. उन्होंने कहा कि इस संशोधन प्रस्ताव से बेंच और बार के बीच संबंध बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
श्री झा ने कहा कि अधिवक्ताओं पर नकेल कसने का प्रयास किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर न्यायिक अधिकारी संरक्षण अधिनियम के माध्यम से अधिकारियों को संरक्षण किया जा रहा है. इस संरक्षण अधिनियम में भी सुधार किया जाना चाहिए. जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विजय कुमार सिंह ने आहूत कार्य बहिष्कार कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संघ के सभी अधिवक्ताओं के प्रति आभार जताया और आगे भी अपनी एकता बनाये रखने की अपील की.
