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लीड. पेज-3// 10 साल बाद भी मसानजोर का टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स अधूराजितनी तत्परता से तत्कालीन सरकार ने रखी थी आधारशिला, उतनी ही सुस्त रही कार्य की रफ्तारकैसे होगा राज्य में पर्यटन विकासफैक्ट फाइल शिलान्यास हुआ: 2006 मेंयोजना आरंभ हुई: 2008-09योजना की लागत: 2.98 करोड़ रुपयेअब तक खर्च : 2.05 करोड़ लगभगअब खर्च होगा: 1.43 करोड़ रुपयेपूर्ण […]

लीड. पेज-3// 10 साल बाद भी मसानजोर का टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स अधूराजितनी तत्परता से तत्कालीन सरकार ने रखी थी आधारशिला, उतनी ही सुस्त रही कार्य की रफ्तारकैसे होगा राज्य में पर्यटन विकासफैक्ट फाइल शिलान्यास हुआ: 2006 मेंयोजना आरंभ हुई: 2008-09योजना की लागत: 2.98 करोड़ रुपयेअब तक खर्च : 2.05 करोड़ लगभगअब खर्च होगा: 1.43 करोड़ रुपयेपूर्ण होने में लगेगा समय: 9 महीने……………….नहीं रहा विभाग काम पूरा करवाने में तत्पर, मॉनिटरिंग भी नहीं की गयीलागत भी बढ़ा और पर्यटकों को लाभ भी नहीं मिल सकाअब नये सिरे से हुआ है टेंडर, जल्द ही संवेदक के साथ होगा करार……………….संवाददाता, दुमकादुमका जिले के मसानजोर में प्रस्तावित टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण एक दशक में भी नहीं हो पाया है. वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री रहते अर्जुन मुंडा ने इसकी आधारशिला रखी थी. लेकिन जितनी तत्परता राज्य की सरकार ने तब आधारशिला रखने में दिखायी थी, उतनी तत्परता इसे बनवाने में उसने नहीं दिखायी. यही वजह थी कि इस टूरिस्ट काॅम्प्लेक्स को बनवाने का काम शुरू हुआ 2008-09 में. इतने विलंब से काम शुरु भी हुआ तो हमेशा राशि के आवंटन में भी पर्यटन विभाग सुस्ती दिखाती. रही सही कसर संवेदक कंपनी ने भी दिखायी. ऐसे में 2014-15 में जब काम पूरा नहीं हुआ, तो उसका नये सिरे से प्राक्कलन तैयार करवाया गया और अब इसके बचे हुए काम का टेंडर निकलवा कर उसे पूरा करने की पहल हुई है. ……….नहीं है मसानजोर में पर्यटकों के ठहरने की मुक्कमल व्यवस्थामसानजोर डैम इस इलाके का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है, लेकिन यहां ठहरने को लेकर किसी तरह की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है. यहां सिंचाई विभाग का गेस्ट हाउस तो है, पर सुविधाओं का टोटा है. आमलोगों को यहां ठहरने की सुविधा भी नहीं मिल पाती है. पश्चिम बंगाल सरकार का भी यहां विभागीय गेस्ट हाउस है, तो उसकी बुकिंग की प्रक्रिया ही जटिल है. ऐसे में पर्यटक यहां रुकते नहीं. ऐसे में इस क्षेत्र का जो विकास है, वह नहीं हो पाता. शाम ढलने से पहले पर्यटकों को यहां से चला जाना मजबूरी हो जाती है………….इलेक्ट्रिक से लेकर फर्निशिंग तक का काम बाकीआसनसोल की कंपनी मेसर्स कंक्रीट को पहले काम मिला था. संवेदक भी अब नहीं रहे. इस संवेदक कंपनी ने आवंटन के अनुरुप काम किया. हालांकि रंग-रोगन से लेकर इलेक्ट्रिक व फर्निशिंग का काम बचा हुआ है. यहां म्यूजिक सिस्टम भी लगाया जाना है. ये सारे काम अब कराने के लिए टेंडर निकाला गया था. टेंडर फाइनल भी हो चुका है. जिला परिषद् सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह काम संवेदक 9 महीने में पूरा कराने के लिए एकरारनामा किया जायेगा…………..फोटो10 दुमका 01…………..मसानजोर का टूरिस्ट काम्पलेक्स, जो अब तक पूरा नहीं बन सका……………

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