दो दिवसीय वैदिक महायज्ञ में 1100 यजमानों ने किया हवनफोटो: 26 जाम 25,26 नगर प्रतिनिधि, जामताड़ा स्थानीय यज्ञ मैदान में दो दिवसीय 1100 कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ एवं विहगम योग समारोह के दूसरे दिन हवन किया. संत पवीर ज्ञानदेव महाराज ने यज्ञ पर व्यापक प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्राण है और वैदिक धर्म का सार है. यज्ञ ही संसार में श्रेष्ठ कर्म है और संसार का प्रत्येक श्रेष्ठतम कार्य यही है. आज आवश्यक है कि यज्ञ को मात्र एक भौतिक कर्मकांड ही न समझा जाय. अपितु उसको अध्यात्मिक रूप से समझ कर इसका अनुष्ठान आवश्यक है.
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