कच्ची व जर्जर सड़क पर चलने को विवश हैं बरमसियावासी प्रतिनिधि, सरैयाहाटसरैयाहाट मुख्यालय से महज 15 किलाेमीटर की दूर देवघर जिले के बाॅर्डर पर स्थित बरमसिया गांव की सड़क का हाल जर्जर है. इस गांव की 400 की आबादी कच्ची और जर्जर सड़क पर आवागमन करने को विवश हैं. ग्रामीणों को गांव जाने के लिए मुख्य सड़क से तीन किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जो काफी उबड़-खाबड़ व कच्ची है. सामान्य दिनों में तो किसी तरह चल जाता है, लेकिन बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है. उस वक्त यहां वाहन तो दूर पैदल चलना भी लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है. गांव में किसी के बीमार पड़ने पर रोगी को इलाज के लिए अस्पताल तक लाने में काफी कठिनाईयां होती है. ग्रामीण बिटिया सोरेन, पक्कू मुरमू, सरजू दास, समर दास, भागरीथ दास, छोटन मुरमू, रामजान मिंया, इसलाम अंसारी, गायो मुरमू, सरफुद्दीन अंसारी, छिलेबी मिंया, उलफत मिंया, सुंदर मरांडी, सुरेश दास, प्रकाश दास आदि ने झारखंड के अलग राज्य बनने के 15 सालों में भी सड़क नहीं बनने से रोष जताया है. ग्रामीणों ने बताया कि झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद उम्मीद जगी थी, लेकिन राज्य गठन के 15 वर्ष बाद भी गांव की स्थिति ज्यो की त्यों बनी हुई है. ………………….फोटो24 सरैयाहाट 02सड़क निर्माण की मांग करते ग्रामीण……………..
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कच्ची व जर्जर सड़क पर चलने को विवश हैं बरमसियावासी प्रतिनिधि, सरैयाहाटसरैयाहाट मुख्यालय से महज 15 किलाेमीटर की दूर देवघर जिले के बाॅर्डर पर स्थित बरमसिया गांव की सड़क का हाल जर्जर है. इस गांव की 400 की आबादी कच्ची और जर्जर सड़क पर आवागमन करने को विवश हैं. ग्रामीणों को गांव जाने के लिए […]
