हत्या मामले के आरोपित को आजीवन कारावास

दुमका : जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अवधेश मिश्रा के न्यायालय ने पांच वर्ष पूर्व हुए एक हत्या के मामले में सेशन केस नंबर 161/10 में अपना फैसला सुनाया है. इसमें रामगढ़ था क्षेत्र के हथियापहाड़ी गांव के पवन देहरी को भादवि की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास की […]

दुमका : जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अवधेश मिश्रा के न्यायालय ने पांच वर्ष पूर्व हुए एक हत्या के मामले में सेशन केस नंबर 161/10 में अपना फैसला सुनाया है. इसमें रामगढ़ था क्षेत्र के हथियापहाड़ी गांव के पवन देहरी को भादवि की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

साथ ही आरोपी को पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपित को तीन महीने अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी.

क्या था पूरा मामला

घटना रामगढ़ थाना क्षेत्र के हथयापहाड़ी की है. 21 मार्च 2010 की रात मिठू मिर्धा की लोहे के रड से मारकर हत्या हुई थी. घटना को लेकर मृतक के पुत्र रामा मिर्धा ने गांव के ही गोतिया पवन देहरी के विरुद्ध 22 मार्च 2010 को थाना कांड संख्या 41/10 भादवि की धारा 302 के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

दर्ज प्राथमिकी में उसने बताया था कि 21 मार्च की रात खाना खाने के बाद सभी सो गये थे. रात के 12 बजे के करीब उसका भाई राजू मिर्धा उसे उठाया और बताया कि पवन देहरी ने उसके पिता की हत्या कर दी है. घटना स्थल पर जाकर देखा तो पाया कि उसके पिता को लोहे के रॉड से मारा गया था और उसके पिता मृत पड़े थे. झगड़े का कारण पूर्व में जमीन जायदाद को लेकर आपस में दुश्मनी चल रही थी.

उसी दुश्मनी के कारण गोतिया पवन देहरी ने उसके पिता को रात में बुलाकर घर के बाहर ले गया और उसकी हत्या कर दी. न्यायालय में सुनवाई के दौरान 12 गवाहों का परीक्षण हुआ. अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी डीके ओझा और बचाव पक्ष की आरे से अधिवक्ता अवधेश सिंह ने केस की पैरवी की.

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