यहां हर दिन झेलनी पड़ती है शर्मिदगी

खुशबू की तरह लाखों लड़कियां खुले में शौच को हैं विवश दुमका : एक ओर जहां प्रधानमंत्री का स्वच्छ भारत मिशन चल रहा है. प्रचार-प्रसार कर लोगों को शौचालय बनवाने के लिए तरह-तरह के अनुदान-योजनाओं का लाभ लेने का अनुरोध किया जा रहा है. वहीं शौचालय नहीं बन पाने की वजह से दुमका में एक […]

खुशबू की तरह लाखों लड़कियां खुले में शौच को हैं विवश
दुमका : एक ओर जहां प्रधानमंत्री का स्वच्छ भारत मिशन चल रहा है. प्रचार-प्रसार कर लोगों को शौचालय बनवाने के लिए तरह-तरह के अनुदान-योजनाओं का लाभ लेने का अनुरोध किया जा रहा है. वहीं शौचालय नहीं बन पाने की वजह से दुमका में एक किशोरी द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने का मामला सुर्खियों में है.
इस जिले को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए अब तक जो भी प्रयास हुए हैं, वह कागजी ही साबित हुए हैं. धरातल पर उन योजनाओं का क्रियान्वयन शायद ही किसी क्षेत्र में सही ढंग से हो पाया है. शहर से सटे इलाके, जो पंचायतों में है, उनकी भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है. विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि अब भी दुमका में 2.56 लाख घरों में से सत्तर फीसदी से अधिक घरों में रहने वाले लोग खुले मैदान में शौच के लिए जाते हैं. शहर से सटी हुई पंचायत है दुधानी.
इसी पंचायत के गोशाला रोड-शास्त्री नगर मुहल्ले में शुक्रवार को 17 वर्षीय खुशबू ने आत्महत्या कर ली थी. उसके घर में शौचालय नहीं बन पा रहा था. घरवाले आर्थिक रूप से कमजोर हैं. घरवाले उसकी शादी को लेकर चिंतित थे. इसलिए शौचालय नहीं बनवा रहे थे. खुशबू ने सरकारी स्तर पर शौचालय बनवाने के लिए आवेदन तैयार कर रखा था. उसने इसके लिए कोशिश भी की थी, दौड़-धूप भी की थी, पर उसकी कोशिश नाकाम रही. सरकारी स्तर पर उसके इलाके में शौचालय अभी बन नहीं रहा था, सो उसके आवेदन धरे के धरे रह गये.
डीसी ने शौचालय विहीन घरों की मांगी रिपोर्ट
दुमका. डीसी राहुल कुमार सिन्हा ने खुशबू की आत्महत्या की घटना को दुखद व विडंबनापूर्ण बताया है. उन्होंने पुलिस जांच को त्वरित करने तथा जांच के आधार पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई का निदेश दिया. साथ ही डीसी ने पेयजल स्वच्छता विभाग प्रमंडल एक एवं दो के कार्यपालक अभियंता को शहरी क्षेत्र एवं शहर के आसपास ग्रामीण क्षेत्र में सघनता से जांच कर शौचालय विहीन घरों की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है.
कहा कि निर्मल ग्राम के प्रावधान के तहत एक से दो माह में अभियान चलाकर शौचालय बनाया जाये. जो घर निर्मल ग्राम के तहत नहीं आते और शौचालय विहीन हैं, उन परिवारों कोभी हर संभव मदद और प्रेरणा दी जाये. हर हाल में जिले के सभी घरों में शौचालय हों, यह भी सुनिश्चित करें.
घर बनाने में ही कर्ज हो गया था फिर शौचालय कहां से बनवाते
खुशबू को घर में शौचालय न होने की तकलीफ थी. हम शौच के लिए सुबह मैदान गये थे, लौटे तो बेटी फंदे में लटक रही थी. सर्वे के लिए एक बार लोग आये थे, पर कुछ भी नहीं हुआ. बेटी बड़ी हो गयी थी. घर बनाने में ही कर्ज हो गया था. शौचालय कहां से बनाते. गरीब का कहीं गुजारा नहीं है.
संजु देवी, खुशबू की मां
सिर्फ बड़ी बातें होती है
प्रशासन से कभी कोई लोग शौचालय बनवाने के लिए नहीं आये. हमलोग 1999 से यहां रहते हैं. चुनाव में जो जीत के जाते हैं, वे भी अपने वायदे भूल जाते हैं. शौच के लिए डंगाल जाना पड़ता है. सरकार-जनप्रतिनिधि बड़ी बात कहते हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं है. बड़ा दुभाग्र्य है. शहर से सटा इलाका होने के बावजूद बहु-बेटियों को खुले में शौच जाना पड़ता है.
अंजू देवी, शास्त्रीनगर
अधिकार ही नहीं मिला
पांच साल बीतने को है. हमें कोई अधिकार ही नहीं दिया गया कि हम जनता के कुछ काम करा सकें. सरकार दोषी है. सरकार ने वायदे झूठे किये. मनरेगा के तहत खुशबू ने भी शौचालय के लिए फार्म लिया था. शौचालय बनाने की पहल होती, तो खुशबू जिंदा होती. आज बेटी ने आत्महत्या की है, यही हालात रहे, तो कल कोई बहु भी करेगी.
लक्ष्मी हांसदा, मुखिया
पंचायत में 3500 घर हैं शौचालय विहीन
दुधानी पंचायत की मुखिया लक्ष्मी हांसदा की मानें तो दुधानी पंचायत में ही साढे तीन हजार से अधिक घर ऐसे हैं, जहां शौचालय बनवाये जाने की जरूरत है. शहर से सटा क्षेत्र है. घनी आबादी है. बावजूद इसके इस पंचायत में शौचालय बनाये जाने की कवायद शुरू नहीं की गयी है.

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