नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा
काठीकुंड : प्रखंड के घोर नक्सल प्रभावित पंचायत बड़ाचापुड़िया के बड़ाचापुड़िया गांव के ग्रामीणों की समस्याओं को जानने के लिए उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा बड़ाचापुड़िया पहुंचे. पहाड़ियों से घिरे बसे इस गांव के लोगों से मिल कर काफी कुछ जानने का प्रयास किया.
उपायुक्त श्री सिन्हा ने उपस्थित ग्रामीणों को बताया कि नक्सलियों का कोई सिद्धांत नहीं होता, इसलिए ऐसे लोगों की मदद करने की बजाय गांव के विकास के लिए प्रशासन की मदद करे. ग्रामीणों से कहा कि आम लोगों की सभी जरूरत की चीजें सरकार द्वारा नि:शुल्क या अत्यंत कम शुल्क पर मुहैया करायी जाती है. प्रशासन ही गांव व ग्रामीणों के विकास के बारे में सोचती है.
उपस्थित ग्रामीणों ने भी साफ लहजे में कहा कि अपने रोजमर्रा की जिंदगी के अलावा वे और किसी भी बात पर ध्यान नहीं देते हैं. उपायुक्त ने बताया कि पूरे दुमका जिले में लगभग 60 से 80 गांव ऐसे है जो विकास की रोशनी से अभी भी कोसों दूर है.
उन गांवों को चिह्न्ति कर वहां प्रशासन द्वारा सभी प्रकार की मुलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी व सड़क मुहैया करायी जायगी जो जनोपयोगी योजनाएं सरकार द्वारा संचालित है. उपस्थित सभी विभागीय कर्मियों को गांव के विकास के लिए सक्रियता दिखाने के निर्देश दिये. मौके पर ग्रामीणों से वृद्धावस्था पेंशन, आंगनबाड़ी केंद्र, पेयजल, इंदिरा आवास, जनवितरण प्रणाली से संबंधित लाभों के बारे में पूछा. उपस्थित महिला व पुरुष ग्रामीणों ने सभी योजनाओं व केंद्रों के नियमित संचालन की बात डीसी से कही.
छात्राओं को पढ़ने के लिए करें प्रेरित
गांव की एक छात्र ने जाति व निवासी प्रमाण-पत्र नहीं बन पाने पर ग्हारहवीं की कक्षा में दाखिले में हो रही समस्या के बारे में बताया. छात्र ने काठीकुंड कस्तूरबा विद्यालय से प्रथम श्रेणी में दसवीं की परीक्षा पास की है. नक्सल प्रभावित गांव से अच्छे नंबर से पास होने पर छात्र को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करते हुए सीओ को जल्द प्रमाणपत्र बनवा देने के निर्देश उपायुक्त ने दिये.
लकड़ी बेच कर चलता है परिवार
ग्रामीणों से रोजगार के स्नेत के बारे में पूछने पर ग्रामीणों ने बताया कि वे जलावन की लकड़ी काट कर बेचते हैं, जिनसे उनका परिवार चलता है. उपायुक्त ने उन्हें बताया कि गांव के वैसे लोग जो आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं,
उन्हें रोजगार परक प्रशिक्षण दिया जायेगा, ताकि महिला हो या पुरूष दोनों आत्मनिर्भर होकर अपना जीवन यापन कर सके. महिलाओं को जहां अचार-पापड़, सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जायेगा,
वहीं पुरुषों को मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर की शिक्षा, दोपहिया वाहन की मरम्मत सहित अन्य प्रशिक्षण दिये जायेंगे. वहीं महिलाओं के लिए बकरीपालन, गायपालन, मुर्गीपालन की सुविधा मुहैया कराने की बात कही.
