आनंद जायसवाल
दुमका : दुमका जिले में 20 सितंबर 2013 को मसलिया के लगभग 3.90 करोड़ रुपये की लागत से बने जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को तत्कालीन सीएम ने उद्घाटन करने से इनकार कर दिया था, उस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का एक बार फिर से रंग रोगन करने का काम चल रहा है.
सीएम रहते हेमंत सोरेन इसका उद्घाटन करने पहुंचे थे, उस वक्त उन्होंने घटिया निर्माण कार्य देख इसका उद्घाटन करने से इनकार कर दिया था. उन्होंने इस बात पर भी एतराज जताया था कि घटिया निर्माण होने के बावजूद किस प्रकार इसका हैंडओवर करा लिया गया. इतना ही नहीं जामा एवं शिकारीपाड़ा में लगभग इतनी ही लागत से बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिसका उद्घाटन उसी दिन श्री सोरेन ने ऑनलाइन किया था, उसे भी रद्द कर दिया था तथा जांच कराने और संवेदक एजेंसी पर प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा था.
मामले में संवेदक एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर आदि पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी. अब हलफनामा दायर कर प्रशासन ने बचा हुआ काम पूरा कराना शुरू किया है. हालांकि सवाल यह उठने लगा है कि जब काम बचा हुआ था, तो उसका उद्घाटन स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों ने कैसे करवाया और करवाने की कोशिश की. ऐसे पदाधिकारियों पर किसी तरह का शिकंजा क्यों न कसा जा सका. बता दें कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है.
क्या कहते हैं आरडीडीएच डॉ जेपी सिंह
तीनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन करोड़ों रुपये की लागत से बने हैं. दो साल से ये भवन बंद ही हैं.अगर न्यायालय से इन भवनों में अस्पताल चलाने की अनुमति मिल जाती, तो तीनों प्रखंडों के लोगों को काफी सहुलियत होगी. गलती संवेदक एजेंसी ने की है और खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है. अभी तीनों जगह प्रखंड मुख्यालय में जो पीएचसी चलते हैं, उनमें जगह व सुविधाओं की कमी है.
