ओके... कुमिरदहा के महामाया लाइब्रेरी का अस्तित्व खतरे में

– लाइब्रेरी की पुस्तकें व सामग्री मध्य विद्यालय में पड़ी- सरकार का मिला सहयोग और न ही जनप्रतिनिधि का- दो साल पूर्व गिरा लाइब्रेरी भवन रानीश्वर . 1950 में स्थापित महामाया लाइब्रेरी सह क्लब का अस्तित्व दो साल पूर्व ही ढह गया. इसके बाद लाइब्रेरी की पुस्तकों को सुरक्षित रखने के लिए किसी प्रकार का […]

– लाइब्रेरी की पुस्तकें व सामग्री मध्य विद्यालय में पड़ी- सरकार का मिला सहयोग और न ही जनप्रतिनिधि का- दो साल पूर्व गिरा लाइब्रेरी भवन रानीश्वर . 1950 में स्थापित महामाया लाइब्रेरी सह क्लब का अस्तित्व दो साल पूर्व ही ढह गया. इसके बाद लाइब्रेरी की पुस्तकों को सुरक्षित रखने के लिए किसी प्रकार का फंड आवंटित नहीं हुआ. जिसके बाद क्लब के सदस्यों ने तत्काल पुस्तकों को मध्य विद्यालय कुमिरदहा में रख दिया था. जहां दो साल के समान पड़ा हुआ था. वर्तमान में विद्यालय भवन के निर्माण के क्रम में उक्त कमरे को तोड़ दिया गया. जिसके बाद पुस्तकालय के समान के रख-रखाव की चिंता गहरा गयी है. नहीं मिला आर्थिक मदद: ग्रामीणों व क्लब के सदस्यों ने क्लब में बंगला जतरा के लिए डे्रस बनवा कर उसे भाडे़ लगाया. उसके आय से लाइब्रेरी का रख-रखाव शुरू किया गया. उधर लाइब्रेरी के लिए किताबों की संख्या भी बढ़ने लगी. लेकिन क्लब व लाइब्रेरी के लिए सरकार, प्रशासन या फिर जन प्रतिनिधि की ओर से सहयोग नहीं मिलने से क्लब की गतिविधि कम होते चली गयी़ किताबें पुरानी हो फटने लगी. नयी किताबें खरीदने की व्यवस्था नहीं हुई़ दो वर्ष पूर्व गिरा भवन: राशि के अभाव में लाइब्रेरी का भवन भी जर्जर होने लगा़ सरकारी सहयोग के लिए ग्रामीणों ने काफी प्रयास किया़ दो साल पहले भारी बारिश से लाइब्रेरी का भवन धराशायी हो गया़ क्लब के सदस्यों ने क्लब का सामान व लाइब्रेरी की किताबें मध्य विद्यालय कुमिरदहा के एक कमरे में सुरक्षित रख दी़ गांव के धीरेंद्रनाथ गोराई की देखरेख में लंबे समय से लाइब्रेरी व क्लब चल रहा था.————————————-फोटो 1 डीएमके/रानीश्वर 1 व 21़ध्वस्त महामाया लाईब्रेरी सह क्लब भवन2़लाईब्रेरी की पूरानी किताबें व अन्य सामान–

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