आदिवासियों को मिले सुरक्षा

दुमका : असम में पिछले दिनों बोडो उग्रवादियों द्वारा की गयी संताल आदिवासियों की हत्या के मामले में भाकपा माले ने केंद्र सरकार और असम की राज्य सरकार के उदासीन रवैये की आलोचना की है. भाकपा माले नेताओं ने वीर कुंवर सिंह चौक दुमका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर अपने आक्रोश का […]

दुमका : असम में पिछले दिनों बोडो उग्रवादियों द्वारा की गयी संताल आदिवासियों की हत्या के मामले में भाकपा माले ने केंद्र सरकार और असम की राज्य सरकार के उदासीन रवैये की आलोचना की है.
भाकपा माले नेताओं ने वीर कुंवर सिंह चौक दुमका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर अपने आक्रोश का इजहार किया और कहा कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को घोषणाएं व बयानबाजी करके चुप नहीं बैठना चाहिए, वरन वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करानी चाहिए. माले नेता सुभाष चंद्र मंडल ने कहा कि असम में संताल के अलावा मुंडा, उरांव कौल, भुईयां, घटवार, तेली, कुम्हार, तमोली आदि अपनी मेहनत से पहाड़ काटकर खेत बनाकर रहने वाली तमाम जातियां और चाय बगानों में काम करने वाले महज मजदूर के तौर पर जाने जाते हैं. वहां की रेल, सड़क व चाय उद्योग में इनकी अहम भूमिका रहती है. कोकराझाड़, गोसाईगांव, मेरीगांव, धुबड़ी, तेजपुर, नावगांव, शोनितपुर आदि जिले में झारखंडी घर-द्वार बनलाकर रह रहे हैं. उनकी अपनी जमीन भी है.
बावजूद आये दिन बोडो द्वारा फैलायी जा रही हिंसा का शिकार उन्हें बनाया जाता है. श्री मंडल् ने कहा कि आजादी के 68 साल बाद भी देश में व्यवस्था नहीं बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि ऐसे नरसंहारों की रोकथाम के लिए कड़े उपाय नहीं किये गये, तो एक नया आंदोलन जन्म लेगा. पुतला दहन के इस कार्यक्रम में पलटन हांसदा, रामेश्वर सोरेन, भुंडा बास्की, हेमलाल सोरेन, सुबास्टेन मरांडी, अवलियस सोरेन, कमलेश्वर सिंह, रामलाल हेंब्रम, बाबूलाल राय, हरदेव राय आदि शामिल थे.

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