बोटम ::::::: धरा रह गया दुग्ध शीतक केंद्र का सपना

अब बन गया है असामाजिक तत्वों का अड्डाप्रतिनिधि, हंसडीहाहंंसडीहा के बनियारा में सरकार द्वारा निर्मित दुग्ध शीतक केंद्र बंद पड़ा है़ यह प्लांट जून 2003 से अक्तूबर 2007 तक चला था़ इस प्लांट के बंद होने का मुख्य कारण दुग्ध की कम उपलब्धता थी. प्लांट को चलाने के लिए कम से कम पांच सौ लीटर […]

अब बन गया है असामाजिक तत्वों का अड्डाप्रतिनिधि, हंसडीहाहंंसडीहा के बनियारा में सरकार द्वारा निर्मित दुग्ध शीतक केंद्र बंद पड़ा है़ यह प्लांट जून 2003 से अक्तूबर 2007 तक चला था़ इस प्लांट के बंद होने का मुख्य कारण दुग्ध की कम उपलब्धता थी. प्लांट को चलाने के लिए कम से कम पांच सौ लीटर दूध की आवश्यकता थी. नुकसान न हो और प्लांट का रख-रखाव सही तरीके से हो, इसके लिए जरूरी था कि इस प्लांट में हर दिन पांच हजार लीटर से दस हजार लीटर दूध पहुंचे. पर ऐसा हो नहीं पाया. वजह चाहे जो भी रही हो, पर इस क्षेत्र को डेयरी उत्पाद के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का सपना धरा का धरा ही रह गया. वर्ष 2009 में झारखंड डेयरी प्रोजेक्ट लागू होने पर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से इसे दुबारा चालू होने की उम्मीद जगी थी़ बताया जा रहा है कि इस केंद्र को चलाने के लिए भारतीय स्टेट गंगवारा, कुरमाहाट, वनांचल ग्रामीण बैंक हंसडीहा से कसवा, बारीडीह, भाटीन, बेलटीकरी, बबनखेता, बनियारा, महादेवगढ़के अलावे अन्य गांवों के किसानों को गाय बांटे गये. इसके अलावे भारतीय स्टेट बैंक सरैयाहाट द्वारा भी उस वक्त गव्य विकास योजना के तहत बीपीएल के आधार पर 19 व्यक्तियों दो-दो गाय एवं शिक्षित बेरोजगारों दो किसानों को पांच-पांच गाय अनुदान पर उपलब्ध कराये गये थे. इसके बावजूद किसान जागरूक नहीं हो सके और यह केंद्र बंद हो गया़ बहरहाल प्लांट बंद रहने से यह स्थल इन दिनों शराबियों एवं जुआडि़यों का अड्डा बन गया हैं. जिससे स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. ———————फोटोबंद पड़ा दुग्ध शीतक केन्द्र / जुआडियों का अड्डा बनता जा रहा परिसर.

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