संवाददाता, दुमका
दुमका जिले के गोपीकांदर में शनिवार को मार गिराये गये दोनों नक्सलियों की पहचान नहीं हो सकी है. हालांकि दोनों के बारे में कुछ सुराग जरुर पुलिस के हाथ लगे हैं, लेकिन उसका सत्यापन नहीं हो पाया है. अभी तक नक्सलियों के शवों को लेने के लिए भी कोई आगे नहीं आया है. दुमका समाहरणालय में पत्रकारों से बातचीत में एसएसबी के आईजी संजय कुमार ने बताया कि इस इलाके में पंद्रह-बीस नक्सलियों के दस्ते के घूमने की जानकारी मिली थी.
उन्होंने कहा कि ये नक्सली विकास के सरकारी काम को बाधा पहुंचा रहे थे. विचारधारा से भटक चुके इन नक्सलियों का काम केवल लेवी वसूलना और दहशत पैदा करना हो चुका है. डकैतों का बड़ा संगठन बन चुका है. मामले में उन्होंने खुद एसएसबी के पदाधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस के संग रणनीति बनायी थी. उसी दौरान स्मॉल एक्शन टीम बनायी गयी थी, जिसमें 22 जवान शामिल थे.
उन्होंने बताया कि शनिवार करो कछुवाकांदर के पास जब यह टीम पहुंची हुई थी, तो इस टीम पर माओवादियों द्वारा फायर किया गया था. निशाना लेकर टीम के उपर फायर किया गया था, जिसके बाद एसएसबी ने जवाबी कार्रवाई की थी. आधे घंटे से अधिक देर तक चली इस कार्रवाई के बाद जानकारी मिली कि दो नक्सली मारे गये हैं. वहां से एसएलआर, सौ के करीब कारतूस व हैंड ग्रेनेड जैसे सामान बरामद हुए थे.
कुमार ने बताया कि रातभर सर्च अभियान जारी रहा था. पुलिस की दबिश व उपस्थिति की वजह से बाकी के नक्सली भाग खड़े हुए थे. पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं, रणनीति बनाकर नक्सलियों की पूरी गतिविधि को खत्म करेंगे. प्रेस कॉफ्रेंस में डीआइजी संताल परगना प्रक्षेत्र आरके लकड़ा, एसएसबी के डीआइजी सोमित जोशी, एसपी किशोर कौशल, परीक्षित बेहरा, एसडीपीओ पूज्य प्रकाश आदि मौजूद थे.
