Dhanbad News: स्मार्ट खनन और नयी श्रम संहिता देश के औद्योगिक भविष्य की जरूरत : राज्यपाल

Dhanbad News: आइआइटी आइएसएम में तीन दिवसीय कॉन्क्लेव शुरू, राज्यपाल ने किया उद्घाटन

Dhanbad News: आइआइटी आइएसएम में तीन दिवसीय कॉन्क्लेव शुरू, राज्यपाल ने किया उद्घाटनDhanbad News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-भारतीय खनि विद्यापीठ (आइआइटी-आइएसएम) धनबाद में तीन दिवसीय बसंतोत्सव की शुरुआत शुक्रवार से हुई. उद्घाटन मुख्य अतिथि राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया. संस्थान के पेनमैन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में इंडस्ट्री-इंस्टीट्यूट-इंट्रैक्शन (आइआइआइ-2026) कॉन्क्लेव की भी शुरुआत हुई. कॉन्क्लेव का विषय है : ‘स्मार्ट माइनिंग, क्रिटिकल मिनरल्स और ग्रीन एनर्जी : आत्मनिर्भर भारत की जरूरत.’ इसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. उद्घाटन अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि स्मार्ट खनन और नयी श्रम संहिता देश के औद्योगिक भविष्य की आवश्यकता हैं. झारखंड इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकता है. उन्होंने झारखंड जैसे खनिज संपदा से संपन्न राज्य में पर्यावरण संतुलन और स्थानीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखकर खनन करने पर जोर दिया. कहा कि आज खनन गतिविधि केवल धरती से खनिज निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सतत विकास और उन्नत तकनीक का समन्वय आवश्यक है. श्री गंगवार ने हरित ऊर्जा पर जोर देते हुए कहा कि जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे. आंकड़ा विश्लेषण और एआइ तकनीकों के उपयोग से खनन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है. उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि लिथियम तथा कोबाल्ट जैसे दुर्लभ खनिजों की खोज और प्रसंस्करण से भारत ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन सकता है.

नयी श्रम संहिता से श्रमिकों को मिलेगा न्यायसंगत पारिश्रमिक

राज्यपाल ने श्रमिकों के अधिकारों और कल्याण को अपने संबोधन का अहम हिस्सा बनाया. उन्होंने कहा कि नयी श्रम संहिता से श्रमिकों को न्यायसंगत पारिश्रमिक मिलेगा. कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानक मजबूत होंगे और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जा सकेगा. अपने संबोधन में राज्यपाल ने संस्थान की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख किया. यहां से शिक्षित अभियंताओं ने राष्ट्र निर्माण में रीढ़ की हड्डी के समान योगदान दिया है. कहा कि शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा यह संस्थान आने वाले समय में भी अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र बना रहेगा.

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Published by: Om prakash rawani

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