कतरास. कोयलांचल की धरती इन दिनों लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाओं से दहशत में है. सोनारडीह से शुरू हुआ जमींदोज और भू-धंसान का सिलसिला अब कतरास के अलग-अलग इलाकों तक पहुंच गया है. लगातार हो रही घटनाओं से लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गयी है. कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश करने को मजबूर हैं.
माइनिंग के जानकारों के अनुसार, जिन इलाकों में लगातार जमीन धंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहां भूमिगत अवैध खनन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. जानकारों का कहना है कि पूर्व में बंद की गयी खदानों को अवैध तरीके से दोबारा खोलकर खनन किये जाने से भूमिगत पिलरों की मजबूती प्रभावित हो सकती है. इसका असर अब जमीन की सतह पर दिखाई दे रहा है.
मार्च में जमींदोज की घटना में गयी थी तीन लोगों की जान
31 मार्च 2026 को सोनारडीह के टंडाबाड़ी में जमींदोज की घटना में पिता-पुत्री समेत तीन लोगों की मौत हुई थी. इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था. इसके बाद 23 अप्रैल की रात हुई जमींदोज की घटना ने लोगों के बीच डर और बढ़ा दिया.
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3 जून को टंडाबाड़ी के समीप राजाकोठी में भू-धंसान हुआ. इसकी चपेट में आने से करीब आधा दर्जन आवास प्रभावित हुए. लगातार घटनाओं के बाद भी क्षेत्र में जमीन के नीचे चल रही गतिविधियों को लेकर लोगों की चिंता बनी रही.
छाताबाद से गोविंदपुर सेलेक्टेड तक घटनाएं
7 जुलाई को छाताबाद फुटबॉल मैदान में गोफ के साथ जमीन धंसने की घटना हुई. इससे आसपास के कई घर प्रभावित हुए और तालाब का पानी सूख गया.
इसके बाद 4 अगस्त को गोविंदपुर सेलेक्टेड में भू-धंसान की घटना हुई, जिसमें करीब आधा दर्जन घर प्रभावित हुए. 7 अगस्त को इसी स्थल पर दोबारा जमींदोज की घटना हुई. इसके बाद करीब एक दर्जन घरों की स्थिति प्रभावित हुई और कई लोग घायल हुए.
26 अगस्त को काजूबगान में बने बड़े गोफ ने सती पांडे तालाब को भी प्रभावित कर दिया. लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने क्षेत्र में जमीन के नीचे चल रही गतिविधियों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं.
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वैज्ञानिक सर्वे और पुनर्वास की मांग
लगातार भू-धंसान की घटनाओं से प्रभावित इलाकों के लोगों की मांग है कि पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाये. इससे जमीन के नीचे भूमिगत खनन और पुराने खनन क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी.
लोगों का कहना है कि जिन इलाकों में जमीन धंसने का खतरा बना हुआ है, वहां रहने वाले परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर बसाने की व्यवस्था की जानी चाहिए. साथ ही भू-धंसान की घटनाओं के कारणों की जांच कर भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है.
