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बैग और थैले के कपड़े से बना मास्क धनबाद वासियों के लिए बन रहा सहारा

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
बैग और थैले के कपड़े से बना मास्क धनबाद वासियों के लिए बन रहा सहारा
बैग और थैले के कपड़े से बना मास्क धनबाद वासियों के लिए बन रहा सहारा

धनबाद : कहते हैं हर विपदा अपने अंदर एक अवसर भी समेटे होती है. बस इस अवसर को बनाने की क्षमता होनी चाहिए. यह पंक्तियां धनबाद में बैग और कपड़े के कैरीबैग के कारोबार से जुड़े कारीगरों पर सटीक बैठती है. जब पूरा भारत कोरोना वायरस जैसी वैश्विक विपदा के कारण लॉकडाउन है, ऐसे समय में स्थानीय स्तर पर स्कूल व एयर बैग के साथ कपड़े वाले थैला बनाने के कारोबार फल-फूल रहे हैं. वे जिन कपड़ों से बैग बनाते थे, उन्हीं कपड़ों से मास्क बनाकर बाजार में इसकी कमी को पूरा कर रहे हैं. उनके मास्क की आज काफी मांग है.बड़ी कंपनियां हुईं अक्षमकोरोना वायरस की वजह से पूरे विश्व में एन-95 के साथ सर्जिकल मास्क की घोर कमी हो गयी है.

इसे देखते हुए मुनाफाखोरों ने इसकी कालाबाजारी भी शुरू कर दी है. सरकार अभी इस तरह के मास्क का उत्पादन प्राथमिकता के आधार पर पहले मेडिकल स्टाफ के लिए कर रही है. धनबाद में कपड़े से मास्क बनाने के कारोबार से जुड़े हुए शोएब आलम बताते हैं कि बाजार में मिलने वाले साधारण मास्क में इस्तेमाल होने वाले कपड़े, बैग और थैले में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों से काफी मिलते-जुलते हैं. ऐसे में उनलोगों ने अभी अपना काम बदल लिया है. उनके अनुसार यह वक्त की जरूरत भी है.

जरूरत को कर रहे हैं पूरा कोरोना वायरस की वजह से धनबाद में भी मास्क की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है. आज बैग के कपड़ों से बने मास्क अकेले आधे से अधिक मांग को पूरा कर रहा है. झारखंड में कोरोना वायरस की दस्तक के साथ ही उनकी मांग में और तेजी देखी जा रही है. जिला प्रशासन ने मास्क बनाने का काम महिला स्वयं सहायता समूह को दिया था. लेकिन, ने इस मांग को पूरा नहीं कर पा रही हैं. क्या कहता है डब्ल्यूएचओमास्क के संबंध में डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के अनुसार, साधारण कपड़े का मास्क भी 70 प्रतिशत तक धूलकण को नाक और मुंह में जाने से रोक देता है. ऐसे में जब एन95 और सर्जिकल मास्क की आपूर्ति बेहद सीमित है तो यह बैग के कपड़ों से बनाये गये मास्क धनबाद वासियों के लिए काफी मददगार साबित हो रहे हैं.

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