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झारखंड की कोयलानगरी में नहीं थम रही कोयला लोडिंग में रंगदारी, इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कह दी बड़ी बात

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
नहीं थम रही कोयला लोडिंग में रंगदारी
नहीं थम रही कोयला लोडिंग में रंगदारी
फाइल फोटो

धनबाद : इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसोसिएशन की 87वीं वार्षिक आमसभा बुधवार को इंडस्ट्रीज भवन, जोड़ाफाटक में हुई. हार्डकोक इंडस्ट्रीज की दशा व दिशा पर मंथन किया गया. बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा कि सरकार बदली, लेकिन कोयला लोडिंग में रंगदारी नहीं रुकी. अब नये-नये चेहरे भी लोडिंग पर रंगदारी मांग रहे हैं. बाघमारा क्षेत्र के एरिया एक से चार में 850 रुपये प्रति टन व एरिया 5 से 12 में 400 से लेकर 650 रुपये प्रति टन लोडिंग में रंगदारी वसूली जा रही है. कुछ नेताओं के संरक्षण में हर लोडिंग प्वाइंट पर रंगदारी वसूली जा रही है.

बीसीसीएल की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है. यही नहीं कोल इंडिया की नीलामी की नयी नीति लागू होने के बाद कुछ फर्जी इकाइयां भी बन गयी हैं, जो अपने नाम पर कोयला का कोटा आवंटित करवा रही हैं. ऐसे तत्व लिंकेज ऑक्शन या ई-ऑक्शन का भी लाभ उठा कर कोयले की कालाबाजारी कर रहे हैं. जब से कोयला को आवश्यक वस्तु अधिनियम (7 इसी) से हटाया गया है, तब से ऐसे तत्व इस धंधे में बढ़ गये हैं. कोल इंडिया से आग्रह है कि हार्डकोक ईकाइयों को एफएसए (फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट) के माध्यम से कोयला आवंटन कराया जाये. वार्षिक आम सभा में वरीय उपाध्यक्ष एसके सिन्हा, उपाध्यक्ष रतन लाल अग्रवावल, योगेंद्र नाथ नरूला, रतन लाल अग्रवाल, दीपक कुमार पोद्दार, राम कुमार अग्रवाल, सज्जन खरकिया, अमितेश सहाय, सचिदा नंद सिंह, इंदर मोहन मेनन, कैलाश प्रसाद अग्रवाल, केदार नाथ मित्तल, रामेश्वर दयाल अग्रवाल, अमित डोकानिया, नवीन कुमार सिन्हा सहित 31 सदस्य उपस्थित थे.

बीएन सिंह ने कहा कि कोलियरियों के राष्ट्रीयकरण का लाभ इंडस्ट्रीज को नहीं मिल रहा है. राष्ट्रीयरण का मुख्य उद्देश्य साइंटिफिक माइनिंग कर कोकिंग कोल का प्रोडक्शन करना था. लेकिन सब कुछ उलटा हो रहा है. ठेकेदारी पर कोयला का प्रोडक्शन हो रहा है. अगर ठेकेदारी करानी थी, तो राष्ट्रीकरण की क्या जरूरत थी. बीसीसीएल के कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है. ठेकेदारी पर कोयला का उत्पादन हो रहा है. कोलियरियों का सरकार फिर से निजीकरण करें, ताकि कोयला अधारित उद्योगों को लाभ मिल सके.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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