धनबाद से सुमन सिंह की रिपोर्ट
Gangaur Festival: झारखंड के धनबाद जिले के कतरास में मारवाड़ी महिला समिति कतरास शाखा के तत्वावधान में गणगौर सिंधाड़ा उत्सव धूमधाम से मनाया गया. 16 दिनों तक चले इस उत्सव का समापन शनिवार को भव्य तरीके से हुआ. राणी सती दादी मंदिर से शुरू हुआ यह आयोजन पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल लेकर आया.
गाजे-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा
उत्सव के अंतिम दिन महिलाएं गाजे-बाजे के साथ गणगौर की प्रतिमा लेकर सूर्य मंदिर स्थित कतरी नदी तट तक पहुंचीं. पूरे रास्ते जयकारों और भक्ति गीतों की गूंज सुनाई दी. श्रद्धालु महिलाएं पारंपरिक तरीके से जुलूस में शामिल हुईं, जिससे वातावरण पूरी तरह धार्मिक और उल्लासपूर्ण हो गया.
कतरी नदी में प्रतिमा विसर्जन
नदी तट पर पहुंचकर विधि-विधान के साथ गणगौर की प्रतिमा का विसर्जन किया गया. इस दौरान महिलाओं ने भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. जयकारों के बीच संपन्न हुआ यह विसर्जन समारोह बेहद भावनात्मक और श्रद्धापूर्ण रहा.
राजस्थानी वेशभूषा में दिखा पारंपरिक रंग
उत्सव के दौरान मारवाड़ी महिलाएं राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी नजर आईं. दिनभर उन्होंने भक्ति भाव से पूजा की और मंगल गीत गाकर उत्सव को जीवंत बना दिया. इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सुहाग की कामना की, जो इस पर्व की विशेष परंपरा है.
समिति की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति की अध्यक्ष रितु अग्रवाल सहित कई महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही. इस मौके पर संगीता जालान, प्रियंका चौधरी, मीना अग्रवाल, दीपा अग्रवाल, मीना खैतान, राखी चौधरी, अंशु अग्रवाल, श्वेता खंडेलवाल, रेणु, सुनीता, नूतन, बबीता, सुधा, सुमन, मीतू अग्रवाल, संध्या, प्रीति सिंघानिया, रेखा, वीणा और पूनम सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं.
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संस्कृति और आस्था का प्रतीक बना गणगौर
कतरास में मनाया गया गणगौर पर्व न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसने मारवाड़ी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवंत किया. इस आयोजन के माध्यम से महिलाओं ने अपनी संस्कृति को संजोने और आगे बढ़ाने का संदेश दिया.
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