धनबाद. भूमिगत आग और भू-धंसान प्रभावित धनबाद-चंद्रपुरा रेलखंड के सुरक्षित विकल्प के रूप में प्रस्तावित नयी रेल लाइन का करीब 70 फीसदी फॉर्मेशन वर्क पूरा हो चुका है. हालांकि, परियोजना के लिए धनबाद और बोकारो में जरूरी पूरी जमीन अब तक रेलवे को उपलब्ध नहीं हो सकी है. जमीन नहीं मिलने वाले हिस्सों में निर्माण कार्य प्रभावित है. रेलवे ने परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में जमीन अधिग्रहण की धीमी रफ्तार समय पर परियोजना पूरी करने में बड़ी चुनौती बन गयी है.
43.8 किमी के वैकल्पिक मार्ग में बनेगी 28 किमी नयी लाइन
प्रस्तावित वैकल्पिक रेल मार्ग की लंबाई करीब 43.8 किमी है. इसमें लगभग 28 किमी नयी रेल लाइन का निर्माण किया जाना है. यह लाइन निचितपुर-तेलो होते हुए चंद्रपुरा से जुड़ेगी. परियोजना पूरी होने के बाद आग और भू-धंसान के जोखिम वाले मौजूदा डीसी रेलखंड के लिए सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा.
नये मार्ग पर ट्रेनों का परिचालन शुरू होने से मौजूदा आग प्रभावित रेलखंड पर निर्भरता कम करने का विकल्प रेलवे के पास होगा. हालांकि, नये मार्ग का निर्माण और जमीन की उपलब्धता दोनों परियोजना की समयसीमा के लिए महत्वपूर्ण हैं.
जमीन अधिग्रहण बनी सबसे बड़ी चुनौती
परियोजना के लिए धनबाद और बोकारो में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक पूरी जमीन रेलवे को नहीं मिल सकी है. धनबाद में अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इसकी रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी बतायी जा रही है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब तीन महीने बीतने के बाद भी अधिग्रहण खर्च की मांग रेलवे से किये जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है.
जून 2026 में धनबाद-मतारी थर्ड लाइन के लिए करीब 13.005 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई थी. हालांकि, वैकल्पिक डीसी रेल लाइन के लिए आवश्यक पूरी जमीन अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है. जिन हिस्सों में जमीन मिल गयी है, वहां फॉर्मेशन का काम आगे बढ़ रहा है.
बोकारो में भुगतान के बाद भी प्रक्रिया धीमी
बोकारो में जमीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन की ओर से रेलवे से राशि की मांग की गयी थी. रेलवे ने दिसंबर 2025 में मांगी गयी राशि का भुगतान कर दिया था. इसके बावजूद जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी.
इससे परियोजना के सामने दो स्तर की चुनौती दिख रही है. धनबाद में अधिग्रहण खर्च से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ना बाकी है, जबकि बोकारो में राशि मिलने के बाद भी जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी नहीं आयी है. परियोजना को निर्धारित समय पर पूरा करने के लिए दोनों जिलों में अधिग्रहण की गति बढ़ाना जरूरी होगा.
474 करोड़ से अधिक की लागत, 68 पुल भी प्रस्तावित
वैकल्पिक डीसी लाइन परियोजना को 28 अगस्त 2023 को मंजूरी मिली थी. इसके बाद एक मार्च 2024 को परियोजना का शिलान्यास किया गया. शुरुआती अनुमान के अनुसार करीब 28 किमी नयी रेल लाइन के निर्माण पर 474.37 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. परियोजना के तहत छोटे-बड़े मिलाकर 68 पुलों का निर्माण भी प्रस्तावित है.
जमीन की कमी के बावजूद उपलब्ध हिस्सों में फॉर्मेशन वर्क जारी है और करीब 70 फीसदी काम पूरा होने की जानकारी है. फॉर्मेशन पूरा होने के बाद संबंधित हिस्सों में ट्रैक बिछाने सहित आगे के निर्माण कार्य को गति दी जा सकेगी. रेलवे का लक्ष्य 2027 तक परियोजना को पूरा करना है.
नयी लाइन से पुराने नौ स्टेशनों पर पड़ेगा असर
वैकल्पिक लाइन तैयार होने के बाद यदि मौजूदा डीसी रेलखंड का यात्री और माल यातायात नये मार्ग पर स्थानांतरित किया जाता है, तो पुराने रेलखंड के नौ स्टेशनों की उपयोगिता प्रभावित हो सकती है. इनमें कुसुंडा, बसेरिया, बांसजोड़ा, सिजुआ, अंगारपथरा, कतरासगढ़, सोनारडीह, फुलारीटांड़ और जमुनियाटांड़ शामिल हैं.
इस लिहाज से परियोजना का असर केवल सुरक्षित रेल परिचालन तक सीमित नहीं रहेगा. नयी लाइन पर परिचालन शुरू होने की स्थिति में पुराने रेलखंड के यातायात और वहां स्थित स्टेशनों की भूमिका पर भी असर पड़ सकता है.
2017 में बंद हुआ था परिचालन, 2019 में फिर चली ट्रेनें
भूमिगत आग के खतरे को देखते हुए धनबाद-चंद्रपुरा रेलखंड पर 15 जून 2017 को ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया था. इसके बाद आंदोलन और विभिन्न स्तरों पर दबाव के बीच 25 फरवरी 2019 से इस रेलखंड पर परिचालन दोबारा शुरू हुआ.
आग प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा को देखते हुए कई स्थानों पर ट्रेनों की गति नियंत्रित रखनी पड़ती है. रेलवे को ट्रैक और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी भी करनी होती है. ऐसे में लंबे समय के लिए सुरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वैकल्पिक रेल मार्ग को महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है. अब इसकी सफलता काफी हद तक समय पर जमीन उपलब्ध होने और निर्माण कार्य में तेजी पर निर्भर करेगी.
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