बीसीसीएल सीएमडी की हत्या की साजिश के साक्ष्य नहीं मिले, CISF जवान की मानसिक जांच की अनुशंसा

बीसीसीएल सीएमडी की हत्या की कथित साजिश के मामले में CISF की विभागीय जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. जवान मदन मोहन तिवारी के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने पर उसकी मानसिक जांच की अनुशंसा की गई है.

धनबाद. बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल की हत्या की कथित साजिश के मामले में सीआइएसएफ की विभागीय जांच में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है. जांच के दौरान जवान मदन मोहन तिवारी के दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी. जांच अधिकारी ने उसकी मानसिक और संज्ञानात्मक स्थिति की जांच मनोचिकित्सक या न्यूरोलॉजिस्ट से कराने की अनुशंसा की है.

जवान ने दावा किया था कि उसने टोटो से यात्रा के दौरान दो अज्ञात लोगों को बीसीसीएल सीएमडी पर जानलेवा हमला या गोली चलाने की साजिश के संबंध में बातचीत करते सुना था. जांच टीम ने उसके बताए मार्ग का भौतिक सत्यापन करने के साथ रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली, लेकिन दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी.

वरिष्ठ कमांडेंट ने की विभागीय जांच

सीआइएसएफ पूर्वी खंड, रांची मुख्यालय के आदेश पर बीसीसीएल इकाई के वरिष्ठ कमांडेंट अजय सिंह ने मामले की जांच की. मुख्यालय ने 14 अक्तूबर को जांच कर आइजी को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था. जांच के दौरान जवान के सहकर्मियों, पत्नी और करीबी मित्रों के बयान लिये गये. इसके अलावा उसका इलाज करने वाले चिकित्सक से भी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली गयी.

जांच का उद्देश्य जवान द्वारा बतायी गयी कथित घटना की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का सत्यापन करना था. इसी क्रम में उसके बताए यात्रा मार्ग और संबंधित स्थानों की भी जांच की गयी.

टोटो में साजिश की बातचीत सुनने का किया था दावा

जांच रिपोर्ट के अनुसार, मदन मोहन तिवारी ने दावा किया था कि 12 अगस्त 2026 को टोटो से यात्रा के दौरान उसने दो अज्ञात लोगों को बीसीसीएल सीएमडी पर हमला या गोली चलाने की कथित साजिश के संबंध में बातचीत करते सुना. जवान के अनुसार, बातचीत में 15 से 35 खोखा तैयार रखने और 27 अगस्त से पहले घटना को अंजाम देने की बात कही गयी थी.

हालांकि, जांच में इस दावे की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र ठोस साक्ष्य नहीं मिला. दोनों कथित संदिग्धों की पहचान भी सामने नहीं आ सकी.

सीसीटीवी फुटेज से भी नहीं हुई पुष्टि

जांच टीम ने जवान द्वारा बताये गये रास्ते का भौतिक सत्यापन किया और विभिन्न स्थानों पर उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच की. हालांकि, किसी फुटेज में कथित बातचीत या दोनों संदिग्धों की मौजूदगी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई.

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यात्रा मार्ग के कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे खराब थे या उनका कवरेज संबंधित क्षेत्र तक नहीं था. इसलिए उपलब्ध फुटेज के आधार पर जवान के दावे की पुष्टि नहीं हो सकी.

सड़क हादसे के बाद स्मृति और व्यवहार में बदलाव का उल्लेख

जांच के दौरान जवान के स्वास्थ्य और व्यवहार से जुड़ी जानकारी भी सामने आयी. रिपोर्ट के अनुसार, मदन मोहन तिवारी 25 अक्तूबर 2025 को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था और उसके सिर का दो बार मेजर ऑपरेशन हुआ था.

उसकी पत्नी, मित्र और सहकर्मियों के बयानों के अनुसार, हादसे के बाद उसकी स्मृति और व्यवहार में बदलाव देखा गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वह कभी-कभी ऐसी घटनाओं को वास्तविक मान लेता था, जिनके वास्तव में घटित होने की पुष्टि नहीं हुई थी.

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए जांच अधिकारी ने उसकी मानसिक और संज्ञानात्मक स्थिति का आकलन सक्षम मनोचिकित्सक या न्यूरोलॉजिस्ट से कराने की अनुशंसा की है. रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि उसकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अंतिम निष्कर्ष चिकित्सकीय जांच के बाद ही निकाला जाना उचित होगा.

जवान के सेवा अभिलेख में पहले की विभागीय कार्रवाई का भी उल्लेख

जांच रिपोर्ट में जवान के पूर्व सेवा अभिलेखों का भी उल्लेख किया गया है. एक जनवरी 2014 को ड्यूटी के दौरान उसकी एके-47 से दो राउंड एक्सीडेंटल फायर हुए थे. इसके बाद उसे एक जनवरी से 18 मार्च 2014 तक निलंबित किया गया था. विभागीय जांच में हथियार संचालन से संबंधित सुरक्षा निर्देशों का पालन नहीं करने का दोषी पाया गया. पांच अप्रैल 2014 के आदेश से उसकी एक वार्षिक वेतन वृद्धि तीन वर्षों के लिए रोक दी गयी थी.

इसके अलावा जून 2022 की अस्थायी ड्यूटी के दौरान जमा होटल बिल को जांच में अमान्य पाया गया. संबंधित होटल 2019 में बंद हो चुका था. बिल पर दर्ज मोबाइल नंबर को लेकर भी आपत्ति सामने आयी. गलत टीए-डीए दावा करने के मामले में 10 जून 2023 को उसके वेतन में एक स्टेज की कमी की गयी थी.

दोपहिया वाहन खरीदने की सूचना या आवश्यक अनुमति नहीं लेने के मामले में भी 22 अप्रैल 2026 को उसे चेतावनी पत्र जारी किया गया था. हालांकि, ये पूर्व विभागीय मामले वर्तमान कथित साजिश के दावे की सत्यता के स्वतंत्र प्रमाण नहीं हैं.

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By Niraj ambasta

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