सात साल बाद भी नहीं बुझी बलियापुर के 41 गांवों की प्यास, 74 करोड़ की जलापूर्ति योजना फिर ठप

बलियापुर ग्रामीण जलापूर्ति योजना के सात साल बाद भी विफल रहने से 41 गांवों में पेयजल का संकट गहरा गया है. मोटर खराब होने से हजारों लोग परेशान हैं.

बलियापुर ग्रामीण जलापूर्ति योजना फेज-वन सात साल बाद भी ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझा पा रही है. करीब 74.53 करोड़ रु की अनुमानित लागत वाली इस योजना से 41 गांवों के 16,342 परिवारों को पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य था.

योजना को वर्ष 2019 तक पूरा किया जाना था, पर 2026 में भी नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है. अगस्त में शीतलपुर जलशोधन संयंत्र का मोटर और पैनल जलने के बाद करीब 20 हजार लोगों के सामने फिर पेयजल संकट खड़ा हो गया.

नल लगा, लेकि पानी का इंतजार नहीं हुआ खत्म (फोटो- AI जनरेडेट)

योजना की समयसीमा बीती, समस्या बरकरार

सामाजिक कार्यकर्ता रमेश कुमार राही ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधीक्षण अभियंता को पत्र भेजकर योजना की स्थिति की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि योजना का काम श्रीराम ईपीसी कंपनी, चेन्नई को दिया गया था.

दामोदर नदी से पानी उठाकर शीतलपुर जलशोधन संयंत्र में शोधन के बाद 41 गांवों तक आपूर्ति की जानी थी. निर्धारित समय बीतने के बावजूद योजना अपेक्षित रूप से संचालित नहीं हो रही है.

दो 350 एचपी मोटर, फिर भी आपूर्ति ठप

राही के अनुसार शीतलपुर संयंत्र में पानी के शोधन और आपूर्ति के लिए 350 एचपी की दो मोटर लगायी गयी हैं. दोनों मोटर खराब होने से जलापूर्ति बाधित है. उनका आरोप है कि एक मोटर पर लगातार अधिक दबाव पड़ने से वह बार-बार जल जाती है. अगस्त में मोटर और पैनल जलने के बाद भी व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी.

जलशोधन और रखरखाव पर भी उठे सवाल

राही ने संयंत्र में जलशोधन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया है. उनका आरोप है कि एलम और ब्लीचिंग का उचित इस्तेमाल नहीं किया जाता. संयंत्र का पंखा खराब रहने तथा नियमित सफाई नहीं होने से पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता है. हालांकि इन आरोपों पर विभागीय पक्ष सामने नहीं आया है.

पाइप और नल की गुणवत्ता पर आरोप

पत्र में घरों तक पहुंचायी गयी पाइपलाइन, नल और नोजल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाये गये हैं. राही का आरोप है कि कई स्थानों पर घटिया गुणवत्ता के प्लास्टिक पाइप और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया. उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि आधारभूत ढांचा टिकाऊ नहीं है, तो योजना का स्थायी लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल सकता.

बिजली और इंटेक व्यवस्था में भी खामी का आरोप

राही ने दामोदर नदी से पानी उठाने वाली इंटेक व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है. उनके अनुसार वहां लगी दो मोटरों की क्षमता में अंतर है. साथ ही मोटर, पैनल और विद्युत उपकरणों के रखरखाव के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों के बजाय अकुशल कर्मियों से काम लेने का आरोप लगाया गया है.

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पहले भी बाधित हो चुकी है जलापूर्ति

फेज-वन में संकट पहले भी सामने आ चुका है. फरवरी 2026 में 41 गांवों में जलापूर्ति बाधित होने की समस्या सामने आयी थी. उस समय मोटर की खराबी के अलावा कर्मचारियों के 11 महीने के मानदेय के बकाये की बात भी सामने आयी थी. मई में घड़बड़ पंचायत में करीब चार महीने बाद पानी की आपूर्ति शुरू हुई थी.

जांच और कार्रवाई की मांग

राही ने दोनों मोटरों को चालू कराने, संयंत्र की तकनीकी व्यवस्था दुरुस्त करने और ग्रामीणों को नियमित शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है. उन्होंने पाइपलाइन, नल, मोटर, पैनल और जलशोधन व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की जांच तथा दोषी एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की है.

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By Shobhit ranjan

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