झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण (जेआरडीए) ने बेलगड़िया टाउनशिप में पुनर्वासित परिवारों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में पहल शुरू की है. प्राधिकरण के कौशल विकास एवं आजीविका विभाग ने टाउनशिप में 16 विकेंद्रीकृत अंडा हैचरी इकाइयां स्थापित करने की तैयारी की है. इन इकाइयों की स्थापना, संचालन और प्रबंधन के लिए एजेंसी के चयन को लेकर जेआरडीए ने प्रस्ताव आमंत्रित (आरएफपी) किये हैं. इच्छुक एजेंसियां 10 सितंबर तक अपने प्रस्ताव जमा कर सकती हैं.
अंडा उत्पादन के साथ आजीविका के अवसर विकसित करने की योजना
प्रस्तावित हैचरी इकाइयों का उद्देश्य सिर्फ अंडा उत्पादन करना नहीं है. इनके संचालन के माध्यम से बेलगड़िया टाउनशिप में रहने वाले पुनर्वासित परिवारों के लिए स्थानीय स्तर पर आजीविका के स्थायी अवसर विकसित करने की योजना है. परियोजना से स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और रोजगार से जोड़ने पर भी जोर दिया जायेगा.
स्थापना से संचालन तक चयनित एजेंसी की होगी जिम्मेदारी
जेआरडीए की ओर से जारी आरएफपी में हैचरी इकाइयों की स्थापना, संचालन और प्रबंधन से जुड़ी शर्तें और मानक निर्धारित किये गये हैं. चयनित एजेंसी को इकाइयों की स्थापना के साथ उनके नियमित संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी निभानी होगी. इच्छुक एजेंसियां निर्धारित शर्तों का अध्ययन कर 10 सितंबर तक प्रस्ताव जमा कर सकती हैं. निविदा से संबंधित दस्तावेज झारखंड सरकार के निविदा पोर्टल पर उपलब्ध हैं.
आवास के साथ आर्थिक पुनर्वास पर भी जोर
झरिया पुनर्वास की प्रक्रिया अब विस्थापित परिवारों को केवल सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है. मई 2026 में बेलगड़िया टाउनशिप के निरीक्षण के दौरान कोयला राज्य मंत्री ने भी पुनर्वास में दीर्घकालीन सामाजिक और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने पर जोर दिया था. इसी क्रम में रोजगार और आजीविका सृजन से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है.
कौशल विकास की पहल से जुड़ रही है हैचरी परियोजना
बेलगड़िया टाउनशिप में पहले से कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियां संचालित हैं. कोयला मंत्रालय की जानकारी के अनुसार यहां बहु-कौशल प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये गये हैं. लाभुकों को इ-रिक्शा जैसे स्वरोजगार के साधनों से जोड़ने की पहल भी की गयी है. वर्ष 2025 में 30 विद्यार्थियों ने बहु-कौशल तकनीशियन प्रशिक्षण पूरा किया था. ऐसे में 16 अंडा हैचरी इकाइयों की प्रस्तावित स्थापना को पुनर्वासित परिवारों के आर्थिक पुनर्वास और रोजगार सृजन की इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है.
