धनबाद : बीसीसीएल के लोदना एरिया में अवस्थित जीनागोड़ा एफ पैच का का काम पिछले तीन माह से बंद है. अनिर्णय की स्थिति के कारण न सिर्फ बीसीसीएल को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि यहां डीओ लगाने वाले बिडरों को अलॉटमेंट के बावजूद कोयला नहीं मिल पा रहा है. इससे यहां लोडिंग का काम करने वाले 300 से अधिक लोडिंग मजदूर आज काम से वंचित हैं.
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जीनागोड़ा परियोजना का विस्तारीकरण जमीन के अभाव में नहीं हो पा रहा है. अगर जमीन की समस्या दूर हो जाये तो यहां से आठ वर्षों में बीसीसीएल को करीब 4000 करोड़ रुपये का लाभ होने की बात कही जा रही है. हर वर्ष कंपनी को 500 करोड़ का लाभ होगा.
ढाई डंपर मिट्टी निकासी पर मिलेगा एक डंपर कोयला
बताते हैं कि जीनागोड़ा एफ पैच स्टिपिंग रेसियो के लिहाज से भी बीसीसीएल के लिए काफी लाभप्रद है. एनआइटी के मुताबिक कोयला व ओबी का स्टिपिंग रेसियो 1: 2.5 का है. यानी यहां ढाई डंपर ओवर बर्डेन (ओबी), मिट्टी की निकासी कर बीसीसीएल को एक डंपर कोयला प्राप्त हो सकता है. जानकारों की माने तो यह स्टिपिंग रेसियो कंपनी के अन्य किसी भी आउटसोर्सिंग पैच में नहीं है.
जमीन मिले तो बंद परियोजना हो सकेगी चालू
बताते हैं कि खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) ने सुरक्षा कारणों से जून 2018 से ही जीनागोड़ा (एफ-पैच) परियोजना से उत्खनन कार्य बंद करा दी है. माइंस की वर्तमान स्थिति ऐसी है, जिससे ललमटिया जैसी खान दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता. यहां न तो हॉलरोड की चौड़ाई पर्याप्त है और न ही बैच की कटिंग ही सही से की गयी है.
इस कारण पूरी माइंस हाइवाल की तरह खड़ी दिख रही है. इस कारण डीडीएमएस ने माइंस को असुरक्षित बताते हुए यहां सेक्शन 22 लगा दिया है. परियोजना के विस्तारीकरण के लिए बीसीसीएल पर्याप्त जमीन दे तो यहां हॉलरोड की चौड़ाई व सही बैंचिंग की जा सकेगी. इसके बाद ही यहां से सेक्शन 22 हट सकता है. इधर, झारखंड उच्च न्यायालय ने बिना विलंब किये बीसीसीएल प्रबंधन को कंपनी हित में निर्णय लेने का निर्देश दिया है.
