एशियन द्वारिका दास जालान सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट ने दी जानकारी
60 साल की उम्र के बाद नियमित करायें जांच
धनबाद : प्रोस्टेट 60 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों में होने वाली बीमारी है. प्रोस्टेट की यह बीमारी गंभीर होने पर कैंसर का रूप ले लेती है. उम्र बढ़ने के साथ दिनचर्या और खानपान में बदलाव से भी प्रोस्टेट कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. विदेशों में तेजी से फैलने वाली प्रोस्टेट कैंसर के मामले अब भारत में भी बढ़ रहे हैं. उक्त बातें एशियन द्वारिका दास जालान सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट डॉ गौरव प्रकाश ने प्रभात खबर से विशेष बातचीत में कही. उन्होंने कहा कि पेशाब में जलन होना, पेशाब में खून आना आदि लक्षणाें को नजर अंदाज न करें. पेशाब में खून आना प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण हैं. कुछ लोग इसे नजर अंदाज कर देते हैं, जो काफी गंभीर हो जाता है.
इससे मरीज की जान भी जा सकती है. हालांकि ऐसे लोगों के लिए एशियन जालान में आधुनिक मशीनों के साथ इलाज की व्यवस्था है. ऐसे मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड व पीएसए स्तर की जांच की जाती है. संदेह होने पर बायोप्सी जांच करायी जाती है. इसके बाद बीमारी पकड़ में आ जाती है.
18 ग्राम से 200 ग्राम तक हो जाती है थैली : पेशाब की थैली (प्रोस्टेट) सामान्य पुरुषों में लगभग 18 ग्राम की होती है. 50 की उम्र के बाद यह बढ़ने लगती है. डॉ गौरव ने कहा कि प्रोस्टेट के मरीजों में यह 150 से 200 ग्राम तक हो जाती है. इसके बाद समस्या आने लगती है. समय पर जांच नहीं कराने पर कैंसर का रूप लेने लगती है.
महिलाओं में भी प्रोस्टेट की समस्या : डॉ गौरव ने बताया कि महिलाओं में भी प्रोस्टेट की समस्या बढ़ रही है. बढ़ती उम्र के साथ, पेशाब की नली की सिकुड़न, हार्मोनल बदलाव आदि की बीमारी हो रही है. महिलाओं की शारीरिक संरचनाएं एेसी होती है, जिससे उन्हें इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है. बताया कि महिलाओं का ब्लाडर बढ़ जाता है. इसे ओवर एक्टिव ब्लॉडर कहते हैं. मेडिकल भाषा में कहा जाता है कि ब्लाडर चिड़चिड़ा हो गया है. इसे नजर अंदाज करने पर कैंसर हो सकता है. इसकी जांच के लिए अल्ट्रासाउंड व अन्य पैथोलॉजी जांच करनी पड़ती है.
सार्वजनिक शौचालय से महिलाओं में इंफेक्शन का खतरा : डॉ गौरव ने बताया कि सार्वजनिक शौचालय में यदि सफाई का ध्यान नहीं रखा गया, तो इससे पेशाब संबंधित इंफेक्शन हो सकते हैं. ऐसे शौचालय से महिलाएं खासकर ज्यादा संक्रमित होती हैं. ऐसे में जब शौचालय जायें तो फ्लश कर ही प्रयोग करें.
5 एमएम से ऊपर की पथरी के लिए ऑपरेशन बेहतर : डॉ गौरव ने बताया कि किडनी में पांच एमएम से छोटी पथरी होने पर इसे दवा व अन्य पद्धति से पेशाब नली से बाहर निकाला जा सकता है. लेकिन अगर पथरी की साइज पांच एमएम से बड़ी है, तो ऐसे में पथरी नहीं निकल पाती. ऐसे लोगों की लेप्रोस्कॉपिक और की हाॅल विधि से ऑपरेशन कर पथरी आसानी से निकाली जा सकती है. मरीज को दो दिनों बाद ही छुट्टी दे दी जाती है. एशियन में यह ऑपरेशन किये जा रहे हैं.
जानें प्रोस्टेट के बारे में
पुरुषों में पाई जाने वाली प्रोस्टेट एक ग्रंथि है. यह कई छोटी-छोटी ग्रंथियों से मिलकर बनी होती है. यह ग्रंथि पेशाब के रास्ते को घेर कर रखती है और उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि के उत्तकों में गैर-नुकसानदेह ग्रंथियां विकसित हो जाती हैं. इससे धीरे-धीरे ग्रंथि का आकार बढ़ने लगता है. इससे मूत्रमार्ग पर दबाव पड़ने लगता है. 60 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों में यह बीमारी देखने को मिलती है.
