धनबाद : प्रदूषण बोर्ड के निर्देश के बाद पीएमसीएच में लंबे समय के बाद प्रयोग की गयी दूषित सूई (निडिल) को डिस्पोजल की कवायद शुरू हो गयी है. अभी कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है. इसलिए मंगलवार से ओपीडी परिसर के पास दस फुट का गड्ढा बनना शुरू हो गया है.
मरीजों के प्रयोग में लायी गयी सूई को अब इस गड्डे में भरा जायेगा. इसके ऊपर से कंक्रीट की कवर होगी. एक छोटे से छेद के माध्यम से इसमें प्रयोग की गयी सूई (सार्प निडिल) को हर दिन डाला जायेगा. अधीक्षक डॉ एस सान्याल इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं.
दस वर्षों तक जमा हो सकते हैं दूषित सूई : दस बाइ दस के इस गड्ढे में दस वर्षों तक के डिस्पोजल किया जा सकेगा. बताया जाता है कि दूषित सूई को इंसीनिरेटर के माध्यम से डिस्पोजल नहीं किया जा सकता है. चार सौ के टेंप्रेचर में भी दूषित सूई नष्ट नहीं होती है. इसलिए गड्ढा भरने के बाद यहां पर मिट्टी भराई कर दी जायेगी. गड्ढा के ऊपर समान्य तरीके से वाहन खड़े हो सकते हैं.
