श्रावणी मेला : मखमली कारपेट पर चलेंगे कांवरिये, बाबा मंदिर में होगी कई खास सुविधाएं

श्रावणी मेला में कांवरियों की सुविधा को ध्यान में रखकर कई कार्य किये जा रहे हैं. बाबा मंदिर में कतराबद्ध कांवरियों की सुविधा के लिए आधुनिक कारपेट बिछाने का निर्णय लिया गया है. मखमली कारपेट से कांवरियों के पैरों को काफी आराम मिलेगा.

Shravani Mela 2023: श्रावणी मेला में अब आठ दिन शेष बचे हैं. बाबा मंदिर में एसी, बिजली, पानी एवं कांवरियों की सुविधा के लिए खास इंतजाम किये जा रहे हैं. बाबा मंदिर में कतराबद्ध कांवरियों की सुविधा के लिए आधुनिक कारपेट बिछाने का निर्णय लिया गया है. मखमली कारपेट से कांवरियों के पैरों को काफी आराम मिलेगा.

मखमली कारपेट के लिए करीब 15 लाख करने होंगे खर्च

जानकारी के अनुसार, मंदिर ने रेलवे द्वारा उपयोग किये जा रहे कारपेट को मंगाने का निर्णय लिया है. इसमें 10 से 15 लाख रुपये तक खर्च होंगे और कंपनी द्वारा दो साल तक की वारंटी दी जायेगी. इससे पहले जो कारपेट उपलब्ध कराये जाते थे, वे 10 दिनों में ही खराब होने लगते थे.

मखमली कारपेट से पैरों को मिलेगा आराम

बता दें कि पिछले साल करीब 30 लाख रुपये कारपेट में खर्च किये गये, लेकिन इस बार मंदिर ने सस्ते दाम पर आधुनिक कारपेट खरीदने का निर्णय लिया है. इस कारपेट में कांवरियों को चलने में काफी आराम मिलेगा. साथ ही कारपेट जैसे-जैसे पुराना होते जायेगा और पानी से भीगेगा, उससे कांवरियों के पैरों को और अधिक आराम मिलेगा. भीगने के बाद इसमें स्पंज जैसा महसूस होगा.

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बिजली की समस्या को देखते हुए चार सौ केवीए का जेनरेटर खरीदेगा मंदिर

श्रावणी मेले में बिजली को लेकर किसी तरह की समस्या नहीं हो, इसके लिए मंदिर प्रशासन ने चार सौ केवीए का जेनरेटर खरीदने का निर्णय लिया है. वर्तमान में बाबा मंदिर में बिजली सप्लाई के लिए कुल तीन जेनरेटर से काम चल रहा है, जिसमें 320 केवीए, 100 केवीए एवं 75 केवीए के जेनरेटर हैं. इससे मंदिर में लगे करीब 150 टन के एसी का लोड देना संभव नहीं हो पा रहा था. इस संबंध में मंदिर प्रभारी सह एसडीएम दीपांकर चौधरी ने बताया कि जेनरेटर खरीदने के लिए सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है. तीन जून तक जेनरेटर मंदिर में पहुंच जायेगा. उसके बाद बिजली को लेकर कोई समस्या नहीं होगी.

शौचालयों में हो रहे काम

मेले के दौरान सुविधा केंद्र में बने पुरुष व महिला शौचालयों को अलग-अलग किया जा रहा है. पहले दोनों शौचालयों के मुख्य द्वारा आमने-सामने थे. इन दरवाजे को बंद कर दोनों शौचालयों के दरवाजे को अलग-अलग जगह बनाया गया है. इससे महिलाओं को सुविधा होगी.

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