मधुपुर. शहर के भेड़वा नवाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में मशहूर अफसानानिगार सआदत हसन मंटो की जयंती समारोह पूर्वक मनायी गयी. लोगों ने उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया. वहीं, धनंजय प्रसाद ने कहा कि सआदत हसन मंटो उर्दू व हिन्दी के हरदिल अजीज, रुढ़िभंजक, साहित्य व कला के बारे में सदियों से चलती आ रही पवित्रता और सात्विकता की बहुमूल अवधारणा को तहस-नहस करने वाले बहुचर्चित व अनोखा अफसानानिगार थे. उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों व अव्यवस्था पर हमेशा चोट करते रहे है. उनकी पहली कहानी तमाशा सहित काली सलवार, ठंड़ा गोश्त, टोबा सिंह, धुंआ व ऊपर नीचे के दरम्यान पर मुकदमा दर्ज किया गया. बावजूद इसके उन्होंने कभी लिखना नहीं छोड़ा. उन्होंने तीन सौ से अधिक कहानियां रेडियो नाटक, पाटकथा व दर्जनों महत्वपूर्ण आलेख लिखे. उन्होंने मुफलिसी कबूल किया पर किसी के सामने न तो झुके और न ही कभी हाथ फैलाये. उनकी परवरिश एक रशुकदार परिवार में हुआ था. उनके सारे रिश्तेदार रशुकदार,ओहदेदार व ऊंचे तालिमदार रहें है. लेकिन उन्होंने बचपन से ही अपना अलग रास्ता तय किया और लेखन को जीवन का जरिया बनाया. हालांकि कुछ लोग उन्हें अश्लील लेखक कहकर बदनाम करते थे. अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किया.
जयंती पर याद किये गये सआदत हसन मंटो
मधुपुर के राहुल अध्ययन केंद्र में कार्यक्रम आयोजित
