निलंबित डीडब्ल्यूओ अशोक प्रसाद पर ठगी का मुकदमा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jul 2013 1:36 PM

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देवघर: यौन शोषण मामले के आरोपित निलंबित जिला कल्याण पदाधिकारी अशोक प्रसाद की दिनों दिन मुश्किलें बढ़ती जा रही है. रविवार को मानव विकास संस्थान सुजापुर के संचालक बेलाबगान मुहल्ले के कालीबाड़ी निवासी रंजन कुमार घोष ने अशोक प्रसाद पर ठगी का मुकदमा दर्ज कराया है. मामले में संस्था के संचालक श्री घोष ने आरोपित […]

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देवघर: यौन शोषण मामले के आरोपित निलंबित जिला कल्याण पदाधिकारी अशोक प्रसाद की दिनों दिन मुश्किलें बढ़ती जा रही है. रविवार को मानव विकास संस्थान सुजापुर के संचालक बेलाबगान मुहल्ले के कालीबाड़ी निवासी रंजन कुमार घोष ने अशोक प्रसाद पर ठगी का मुकदमा दर्ज कराया है. मामले में संस्था के संचालक श्री घोष ने आरोपित कल्याण पदाधिकारी पर कर्ज के बहाने चार लाख रुपये ठगी करने का आरोप लगाया है.

एफआइआर के मुताबिक : वर्ष 2011 में उनकी संस्था के साथ कल्याण विभाग ने गो पालन योजना प्रोटोटाइप माडा के तहत एक करोड़ का अनुबंध किया था.

इस काम के एवज में कल्याण विभाग ने उनकी संस्था के नाम 15 लाख रुपये का चेक 25 मई 2011 को दिया था. राशि मिलने के बाद काम शुरू किये. श्री घोष ने कहा कि काम करने के बाद मिली राशि का सामंजन कर सभी रसीद, बिल व वाउचर कल्याण विभाग में जमा कर दिया था. इसी क्रम में कल्याण पदाधिकारी से जान-पहचान हुई.

पटना में मकान बनाने के नाम पर लिया कर्ज
श्री घोष ने कहा कि 26 मई 2011 को कल्याण पदाधिकारी ने उन्हें अपने आवास पर बुला कर कहा कि पटना में मकान बना रहे हैं, इसके लिये उन्हें चार लाख रुपये कर्ज चाहिए. हाउसिंग लोन मिलने पर कर्ज का रुपये वापस कर देंगे.

विश्वास में लेकर कल्याण पदाधिकारी ने उनसे कर्ज ले लिया. कर्ज की राशि में से उन्होंने एक लाख रुपये इंडियन बैंक के खाता नंबर 735734968 से ट्रांसफर किया. शेष दो लाख रुपये मनोज वर्णवाल से दिलाया. घर में रखा हुआ 25 हजार रुपये भी लेकर दिया. सभी राशि मई महीने के अंत तक श्री घोष ने कल्याण पदाधिकारी के आवास पर दिया. इसके दो दिन बाद फिर उनके आवास पर जाकर 75 हजार रुपये का भुगतान कर दिया. रुपये कल्याण पदाधिकारी ने घरेलू नौकर को रखने दिया था.

पैसा मांगने पर गबन के आरोप में फंसाने की दी धमकी
बाद में जब श्री घोष ने पैसा मांग करना शुरू किया तो कल्याण पदाधिकारी ने उनके द्वारा माडा योजना में किये काम को गलत साबित कर,काम छीन लिया. उन्होंने यह भी धमकी दी थी कि कहीं शिकायत करोगे तो गबन के आरोप में फंसा देंगे. धमकी की वजह से संस्था संचालक ने थाने में शिकायत नहीं दी.

कल्याण पदाधिकारी जब जेल चले गये तब हिम्मत जुटा कर थाना पहुंचे और शिकायत दर्ज करायी. नगर पुलिस मामले की पड़ताल में जुटी है. आरोपित कल्याण पदाधिकारी अभी मंडल कारा में काराधीन हैं. अब पुलिस निलंबित कल्याण पदाधिकारी को इस मामले में भी रिमांड करेगी. इस संबंध में नगर थाना में कांड संख्या 183/13 भादवि की धारा 406 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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