देवघर : दिल्ली रेप कांड में फैसला आ चुका है, जबकि जसीडीह गैंग रेप में अब तक सही दोषी का पता नहीं चल पाया है. जसीडीह पुलिस लाइन में दो लड़कियों के साथ रेप व हत्या की घटना के चार माह बीत चुके हैं.
लेकिन केस का अनुसंधान रेंग–रेंग कर चल रहा है. पहले पुलिस ने मामले को लंबा खींचा. मामला इतना हाइ प्रोफाइल हो गया कि राज्य सरकार ने डबल मर्डर मिस्ट्री की जांच का जिम्मा सीआइडी को सौंप दिया. सीआइडी भी तकरीबन एक माह तक अनुसंधान करती रही लेकिन नजीता कुछ नहीं निकला. मामले को लंबा खिंचता देख राज्यपाल ने केस को सीबीआइ को सौंपने का निर्णय लिया.
उन्होंने सीबीआइ जांच की अनुशंसा भी कर दी. लेकिन पुलिस मुख्यालय ने यह दलील दी कि जब तक मामले की जांच के लिए सीबीआइ तैयार नहीं होती है, तब सीआइडी जांच जारी रहेगी. सीआइडी व सीबीआइ के पेच में देवघर पुलिस ने इस केस से ध्यान हटा दिया. नतीजा हुआ कि निर्धारित समय पर पुलिस ने कोर्ट में चाजर्शीट दाखिल नहीं किया.
और इस केस के एक अभियुक्त पुलिस जवान सुधीर को बेल मिल गया. इस तरह जसीडीह मर्डर मिस्ट्री के लगभग चार माह बीतने को है लेकिन अभी तक न पुलिस और न ही सीआइडी ही अंजाम तक पहुंचा पायी है. जहां तक सीबीआइ जांच का सवाल है तो मामला अभी तक ठंडे बस्ते में ही है.
यह निर्णय राष्ट्रपति शासन का था अब राज्य में झामुमो–कांग्रेस की सरकार बनी है. लेकिन इस केस के जांच की गति काफी धीमी है. वहीं केस की सीबीआइ जांच की मांग को लेकर दोनों नाबालिग लड़कियों के परिजन हाइकोर्ट की शरण में गये हैं.
