भूमि घोटाले के आरोपित पर लगी है संगीन धाराएं

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Oct 2014 6:06 AM

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देवघर: देवघर भूमि घोटाले में जितने भी आरोपित बनाये गये हैं, अब उनका बाहर रहना कोर्ट के आदेश पर ही निर्भर है. क्योंकि केस संख्या 15/12 (डी) व 16ए (डी) में सीबीआइ ने चाजर्शीट दायर करके कार्रवाई के लिए गेंद अब कोर्ट के पाले में डाल दिया है. इस जांच में अहम बात यह है […]

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देवघर: देवघर भूमि घोटाले में जितने भी आरोपित बनाये गये हैं, अब उनका बाहर रहना कोर्ट के आदेश पर ही निर्भर है. क्योंकि केस संख्या 15/12 (डी) व 16ए (डी) में सीबीआइ ने चाजर्शीट दायर करके कार्रवाई के लिए गेंद अब कोर्ट के पाले में डाल दिया है.

इस जांच में अहम बात यह है कि सीबीआइ ने जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया है उसमें अधिकांश धाराएं नन-बेलेबुल हैं. इसलिए जो भी इस मामले में फंसे हैं, सभी आरोपितों को फौरी राहत नहीं मिल सकती है.

19 जून 2012 में सीबीआइ ने देवघर भूमि घोटाले में जो मामला दर्ज किया था, उसमें अंडर सेक्शन 120-बी आर/डब्ल्यू भादवि की धारा 109, 201, 409, 419, 420, 423, 424, 467, 468, 469, 471, 477 ए, 506, पीसी एक्ट 1988 के तहत सेक्शन 13(2) आर/डब्ल्यू 13(1)(डी), एसपीटी एक्ट के तहत सेक्शन 53, संतालपरगना रेगुलेशन-(2) 1988 के तहत सेक्शन 25ए आदि संगीन धाराओं के तहत कार्रवाई हुई है. इसी आधार पर सीबीआइ ने जांच पूरी की है. उस वक्त सीबीआइ ने पहले मामले में एक सीओ समेत 25 अन्य को आरोपित बनाया था जबकि दूसरे मामले में एक डिप्टी कलेक्टर सह प्रभारी सब रजिस्ट्रार दुमका सहित 37 को आरोपित बनाया था.

संगठित गिरोह ने दिया कारनामे को अंजाम : जांच में सीबीआइ ने पाया कि देवघर के 826 एकड़ भूमि के घोटाले में अभिलेखागार, रजिस्ट्री ऑफिस, अंचल कार्यालय के अधिकारी, कर्मचारी और देवघर के जमीन कारोबारियों का संगठित गिरोह काम कर रहा था. जिसने न सिर्फ अभिलेखागार के दस्तावेजों में छेड़छाड़ करवाया बल्कि फरजी तरीके से सरकारी जमीन को भी बेचा भी और तो और जब मामले की जांच हुई तो अभिलेखागार से उस महत्वपूर्ण दस्तावेजों को गायब करके उसे जला दिया. अभिलेखागार मामले की जांच अभी चल रही है.

प्रिंसिपल समेत तीन पर छिनतई का लगा आरोप

देवघर. आर्य मिशन स्कूल गिधनी के प्रिंसिपल एसके सिंह, सुनील झा व संतोष झा के विरुद्ध सीजेएम कोर्ट में गिधनी गांव के रहने वाले रामनाथ झा ने मुकदमा किया है. इस मुकदमा में परिवादिनी ने खुलासा किया है कि जमीन को लेकर झंझट पहले से चल रहा था. परिवादी द्वारा विवादित जमीन पर पहले निषेधाज्ञा लगी थी. बाद में धारा 145 के तहत कार्रवाई की गयी. इसकी नोटिस पक्षकार को जब मिली तो आक्रोश में आ गये और परिवादी की जम कर धुनाई कर दी. इस घटना के क्रम में गले से चांदी की चेन तथा 15 सौ रुपये छीन लिये. इसकी शिकायत को थाना में अनसुनी कर दी तो न्याय के लिए कोर्ट में केस किया है.

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