देवघर : महिलाओं के नाम पर एक रुपये में जमीन की रजिस्ट्री करने की योजना के तहत देवघर के 10 अफसरों की बीवियों के नाम से जमीन करने के लिए कर्मियों ने पूरा साथ दिया है. अफसर के दबाव में हल्का कर्मचारी से लेकर सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटन सीआइ तक को हर काम करना पड़ा है. जो काम आम लोगों का महीनों से लटका रहा, ठीक वैसा ही काम खास लोगों का घंटों में होता रहा. विधि शाखा में आवेदन पड़ते ही बाबुओं ने फाइलें बढ़ायी. अंचल कार्यालय से हल्का कर्मचारी व सीआइ ने एक ही दिन में जांच रिपोर्ट दिया.
सीओ ने भी निर्धारित समय के अंदर विधि शाखा में रिपोर्ट भेजी, यहां फाइलें तेजी से दौड़ी व दो माह के अंदर जिलास्तरीय कमेटी ने बैठक एलपीसी दिया. ठीक उसी तरह ऑनलाइन रजिस्ट्री में ज्यादा छानबीन न कर रजिस्ट्री हुई. म्यूटेशन के आवेदन पर भी 12 घंटे में हल्का कर्मचारी व सीआइ ने जांच पूरी कर ली, जिसके बाद 18 वें दिन म्यूटेशन हो गया. कुल मिलाकर एलपीसी, रजिस्ट्री म्यूटेशन के हर काम में अफसरों के दबाव बना रहा व फाइलें दौड़ती रही. कर्मी भी आखिर अपने साहब की पत्नी के नाम होने वाली जमीन के काम पर कुंडली कैसे मार सकते हैं, इसलिए कर्मियों खूब साथ दिया.
दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने के बाद भी रिजेक्ट
शहर के बरमसिया मौजा स्थित विद्यूभूषण रोड निवासी नरेश कुमार सिंह ने देवघर अंचल में जमीन म्यूटेशन के लिए 26 मई 2018 को आवेदन दिया. नरेश सिंह ने खाता नंबर 3/2865 व प्लॉट नंबर 499/536 की जमीन का म्यूटेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन सारे दस्तावेज को अपलोड कर दिया. आवेदन पर 11 जून को सुनवाई हुई व सात जुलाई को यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि आवेदक के द्वारा म्यूटेशन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है, और न ही ऑनलाइन आवेदन में दस्तावेज अपलोड किया गया है.
दस्तावेज नहीं होने के कारण आवेदन को रिजेक्ट कर दिया जाता है. अब आवेदक नरेश सिंह का कहना है कि उन्होंने ऑनलाइन आवेदन में म्यूटेशन से संंबंधित सभी दस्तावेजों को अपलोड किया था, बगैर अपलोड किये आवेदन ही फॉरवर्ड नहीं होती है. उनके आवेदन पर मनमाने ढंग से निर्णय लिया गया है.
दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने के बाद भी रिजेक्ट
शहर के बरमसिया मौजा स्थित विद्यूभूषण रोड निवासी नरेश कुमार सिंह ने देवघर अंचल में जमीन म्यूटेशन के लिए 26 मई 2018 को आवेदन दिया. नरेश सिंह ने खाता नंबर 3/2865 व प्लॉट नंबर 499/536 की जमीन का म्यूटेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन सारे दस्तावेज को अपलोड कर दिया. आवेदन पर 11 जून को सुनवाई हुई व सात जुलाई को यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि आवेदक के द्वारा म्यूटेशन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है, और न ही ऑनलाइन आवेदन में दस्तावेज अपलोड किया गया है.
दस्तावेज नहीं होने के कारण आवेदन को रिजेक्ट कर दिया जाता है. अब आवेदक नरेश सिंह का कहना है कि उन्होंने ऑनलाइन आवेदन में म्यूटेशन से संंबंधित सभी दस्तावेजों को अपलोड किया था, बगैर अपलोड किये आवेदन ही फॉरवर्ड नहीं होती है. उनके आवेदन पर मनमाने ढंग से निर्णय लिया गया है.
