मधुपुर : मधुपुर स्टेशन के रैक प्वाइंट पर एफसीआइ का लाखों रुपये का चावल पानी में भीग कर बर्बाद होने के मामले की धनबाद से एफसीआइ की तीन सदस्यीय टीम ने मधुपुर पहुंच कर जांच की. 16 जून को रैक प्वाइंट पर खुले आसमान के नीचे आनन-फानन में वैगन से उतरवा दिया गया गया था. बारिश के कारण चावल के सैकड़ों बोरे भीग गये थे. इससे चावल में नमी आ गयी. कुछ चावल के बोरे फट कर पानी में बह गये.
वहीं एफसीआइ गोदाम मालिक ने बताया कि उन्होंने 15 दिन पूूर्व ही पत्र लिख कर ईद के समय चावल की रैक नहीं भेजे जाने की बात कही थी. क्योंकि ईद में मजदूर व ट्रक चालक काम पर नहीं रहेंगे. प्रभात खबर में 17 जून को खबर प्रकाशित होने के बाद एफसीआइ धनबाद की तीन सदस्यीय टीम ने मधुपुर रेलवे साइडिंग पहुंच कर चावल का उठाव प्रारंभ किया. अधिकारियों ने बताया कि रेल प्रशासन को साइडिंग में छावनी बनाने के लिए कई बार पत्र लिखा गया है. इसके बाद भी रेल प्रशासन छावनी का निर्माण नहीं कराया गया. इस कारण चावल पानी में भीग गया.
चावल, सीमेंट व खाद के रैक लगते हैं
मधुपुर रेलवे साइडिंग पर हर माह औसतन आठ रैक लगते हैं. इसमें छह रैक एफसीआइ के होते हैं. मालगाड़ी का रैक लगने के छह घंटे के अंदर वैगन से सामान खाली करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता है, जबकि छह घंटे के बाद प्रत्येक घंटे, प्रत्येक बोगी के लिए न्यूनतम 100-150 रुपये शुल्क रेलवे को जुर्माना के तौर पर अदा करना होता है. राशि का निर्धारण रेलवे करता है. एक रैक में सामान्यत: 42 बोगी व जंबो रैक में 58 बोगी रहती है. ऐसे में हर घंटे जुर्माने की राशि 6 हजार से 8 हजार होती है.
बरसात के समय में अक्सर खाद, सीमेंट व चावल, गेंहूं मंगाने वाले संस्थान के सामान की बर्बादी पानी के भीगने के कारण होती है और नुकसान भी उठाना पड़ता है. जुर्माना से बचने के लिए लोग जल्दीबाजी में अपना सामान बोगी से उतरवा लेते हैं. हालांकि इस मामले में रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि मधुपुर के रैक प्वाइंट पर शेड निर्माण का कोई प्रस्ताव नहीं है.
