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Holi 2022: बाबा मंदिर में होली की तैयारी शुरू, 3 दिन त्योहार मनाने की परंपरा, जानें कब होगा होलिका दहन

देवघर के बाबा मंदिर में होली की तैयारी शुरू हो गयी है. वहीं, होलिका के दिन मंदिर में जलार्पण की व्यवस्था दोपहर ढाई बजे तक चलेगी. इस दौरान हरिहर मिलन का भी कार्यक्रम आयोजित होगा. इस साल 10 मार्च से होलाष्टक लगेगा.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news: देवघर के बाबा मंदिर में होली की तैयारी शुरू. 17 मार्च को होलिका दहन का आयोजन.
Jharkhand news: देवघर के बाबा मंदिर में होली की तैयारी शुरू. 17 मार्च को होलिका दहन का आयोजन.
प्रभात खबर.

Holi 2022: देवघर के बाबा मंदिर में होली की तैयारी शुरू हो गयी है. 17 मार्च की देर रात 1:30 बजे हरिहर मिलन होगा. वहीं, हाेलिका दहन रात के 1:10 बजे किया जायेगा. अंग्रेजी तारीख के अनुसार देखा जाये, तो रात 12 बजे के बाद तारीख बदल जायेगा यानी 18 मार्च को हरिहर मिलन और हाेलिका दहन किया जायेगा. इसके लिए भगवान हरि दोलमंच के लिए डोली पर दोपहर तीन बजे मंदिर के पश्चिम द्वार से प्रस्थान करेंगे. वहीं, मंदिर में जलार्पण की व्यवस्था ढाई बजे तक ही चलेगी.

02:30 बजे बंद हो जायेगा बाबा मंदिर का पट

दोलमंच प्रस्थान होने के पूर्व चली आ रही परंपरा के अनुसार, आधे घंटे पहले बाबा मंदिर का पट बंद हो जायेगा. यह जानकारी इस्टेट पुरोहित श्रीनाथ पंडित ने दी. उन्होंने बताया कि इस बार दोलमंच के लिए प्रस्थान का समय दोपहर 3 बजे का है. इसलिए 02:30 बजे बाबा मंदिर की साफ-सफाई के बाद पट को बंद कर दिया जायेगा. दोपहर 02:55 बजे सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा अपने निवास से निकलकर बाबा मंदिर के द्वार पर आयेंगे. उसके बाद बाबा मंदिर का पट खोला जायेगा. गर्भगृह में जाकर महंत बाबा पर गुलाल अर्पित कर होली की शुरुआत करेंगे.

भगवान विष्णु की मूर्ति का मंदिर परिसर में होगा परिक्रमा

इसके बाद राधा-कृष्ण मंदिर से हरि यानी भगवान विष्णु की मूर्ति बाहर निकाली जायेगी. मूर्ति को डोली पर बिठाकर मंदिर में परिक्रमा कराने के बाद पश्चिम द्वार होते हुए आजाद चौक स्थित दोलमंच ले जाया जायेगा. इस बीच रास्ते में पड़ने वाले सभी चौक-चौराहों पर रुक कर भगवान को विशेष भोग और मालपुआ का भोग लगाया जायेगा. इस दौरान शहर के लोग भगवान पर गुलाल अर्पित करेंगे. हाेलिका दहन होने तक दोलमंच पर मंदिर के भंडारियों द्वारा भगवान को झूले पर झुलाया जायेगा. इस बीच शहर के लोग दोलमंच पर जाकर भगवान कर दर्शन कर गुलाल अर्पित करेंगे.

क्या है मान्यता

मान्यता के अनुसार, हरिहर मिलन बाबा बैद्यनाथ का स्थापना दिवस से जुड़ा है. परंपरा के अनुसार, फाल्गुन मास पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु के कर कमलों से इस नगरों में शिवलिंग की स्थापना की गयी है. मान्यता के अनुसार, इसी खास दिन पर हरि यानी विष्णु और हर मतलब महादेव का मिलन हुआ था. मिलन के साथ बाबा की स्थापना दिवस मनाने की परंपरा चली आ रही है.

पूजा कर होलिका दहन का होगा कार्यक्रम

बाबा मंदिर इस्टेट की ओर से रात के करीब पौने एक बजे से होलिका की विशेष पूजा दुर्गा प्रसाद शुरू करेंगे. इस दौरान विशेष भोग अर्पित करने के बाद तय समय रात के 01.10 बजे होलिका दहन कर भगवान को दोबारा डोली पर बिठाकर मंदिर के पूरब द्वार से मंदिर में लाया जायेगा. तय समय 01:39 बजे बाबा मंदिर के गर्भगृह में हरि एवं हर का मिलन होगा. इस क्षण को देखने के लिए काफी संख्या में लोग गर्भगृह में मौजूद रहेंगे. परंपरा के अनुसार, यह मिलन कुछ क्षण के लिए होगा. उसके बाद भगवान को पुन: राधा-कृष्ण मंदिर लाकर शोड्षोपचार विधि से पूजा करने के बाद छप्पन भोग अर्पित किया जायेगा. इस बार रात 01:29 बजे तक भद्रा योग होने की वजह से मिलने के शुभ मुहूर्त में देर हो रही है.

10 मार्च से होलाष्टक

हाेलिका दहन 17 मार्च को होगा. इस दिन होलिका की पूजा-अर्चना की जायेगी. वहीं, होली से 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाता है. यानी इस साल 10 मार्च से होलाष्टक लगेगा. होलाष्टक के दिन कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य जैसे विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश आदि नहीं किये जाते हैं. होली से पहले होलिका पूजा को काफी महत्वपूर्ण माना गया है.

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

होलिका दहन : 17 मार्च
होलिका दहन मुहूर्त : रात 01.10 बजे
रंगवाली होली : 18 मार्च
पूर्णिमा तिथि शुरू : 17 मार्च दोपहर 01:29 बजे
पूर्णिमा तिथि खत्म : 18 मार्च दोपहर एक बजे

18 मार्च को होली

होली का त्योहार चैत्र मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. इस साल होली का त्योहार 18 मार्च, 2022 को मनाया जायेगा. बाबा नगरी में तीन दिन होली मनाने की परंपरा है. 17 मार्च को यहां शाम से अबीर गुलाल की होली होगी. वहीं, 19 मार्च को बासी होली मनाने की परंपरा है.

Posted By: Samir Ranjan.

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Published Date

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