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देवघर में 12 साइबर क्रिमिनल गिरफ्तार, बैंक अधिकारी बन कर व अन्य तरीके से लोगों से करते हैं ठगी, 3 बाइक समेत कई सामान बरामद

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
12 साइबर क्रिमिनल की गिरफ्तारी संबंधी जानकारी देते देवघर एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा व अन्य.
12 साइबर क्रिमिनल की गिरफ्तारी संबंधी जानकारी देते देवघर एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा व अन्य.
प्रभात खबर.

Jharkhand Cyber Crime News (आशीष कुंदन, देवघर) : झारखंड के देवघर में साइबर क्राइम का मामला लगातार बढ़ रहा है. देवघर को सेफ जोन मानकर साइबर क्रिमिनल अपने मंसूबों को अंजाम देते हैं. कभी बैंक अधिकारी बन कर, तो कभी अन्य माध्यमों से लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं. झारखंड के पुलिस अधिकारी इन साइबर क्रिमिनल पर हर दिन नकेल भी कसती है. इसके बावजूद साइबर क्राइम की घटना रुकने का नाम नहीं ले रहा है.

देवघर एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा के निर्देश पर साइबर थाने की पुलिस ने मोहनपुर थाना क्षेत्र के बांक, पालोजोरी थाना क्षेत्र के पोखरिया व बाघमारा और मधुपुर थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव में छापेमारी की. इस दौरान तीन बाइक के साथ 12 साइबर क्रिमिनल को गिरफ्तार किया गया. इन साइबर क्रिमिनल के पास से छापेमारी टीम ने दो लैपटॉप, एक माइक्रो पॉश मशीन, 28 मोबाइल, 54 सिमकार्ड, 12 एटीएम कार्ड व 11 पासबुक भी बरामद किया है. यह जानकारी पुलिस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसपी ने दी.

एसपी श्री सिन्हा ने बताया कि गिरफ्तार साइबर क्रिमिनल में मोहनपुर थाना क्षेत्र के बांक गांव निवासी आकाश कुमार, ऋतिक रोशन, राहुल कुमार, किशोर कुमार, बांझी गांव निवासी तुषार कुमार, पालोजोरी थाना क्षेत्र के पोखरिया गांव निवासी मुस्ताक अंसारी, अरशद अंसारी, बाघमारा गांव निवासी चंदन कुमार ठाकुर, कपिल ठाकुर, मधुपुर थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव निवासी पवन कुमार दास, चुनचुन दास व अजीत दास शामिल है.

गिरफ्तार साइबर क्रिमिनल के पास से बरामद मोबाइल में अपराध से सबंधित काफी साक्ष्य मिले हैं. मामले को लेकर साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. कोविड जांच के बाद गिरफ्तार साइबर क्रिमिनल को कोर्ट में पेश कराया जायेगा, फिर कोर्ट के निर्देश पर इन सभी को न्यायिक हिरासत में भेजा जायेगा. प्रेस वार्ता में साइबर डीएसपी नेहा बाला, मुख्यालय डीएसपी मंगल सिंह जामुदा, साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुधीर पौद्दार, एसआइ रूपेश कुमार व अन्य मौजूद थे.

अरशद के पास मिला माइक्रो पॉश मशीन

एसपी ने बताया कि माइक्रो पॉश मशीन आरोपी अरशद के पास से बरामद हुआ. इसके अलावे उसके मोबाइल में सीएसपी से सबंधित बहुत सारे एप भी इंस्टॉल मिले हैं. वह सीएसपी संचालक था क्या, इस बारे में अभी सत्यापन नहीं हो सका है. पूछताछ में पुलिस को उसने बताया कि कमीशन पर वह साइबर अपराध का पैसा निकासी कराता था. एसपी ने बताया कि पल्सर बाइक राहुल व कपिल के पास से, एसपी साइन बाइक मुस्ताक के पास से बरामद हुआ है. एसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है.

अलग-अलग तरीके से ठगी करते हैं साइबर क्रिमिनल

एसपी ने जानकारी देते हुए कहा कि साइबर क्रिमिनल अलग-अलग तरीके से झांसे देकर लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ा ले रहे हैं. पूछताछ में साइबर क्रिमिनल ने बताया कि विभिन्न बैंकों के अधिकारी बनकर लोगों को कॉल कर वे लोग ठगी करते हैं. केवाईसी अपडेट का झांसा देकर बैंक की सारी जानकारी हासिल कर लोगों के खाते में रखे रकम को मिनटों में खाली कर देते हैं. फोन-पे, पेटीएम मनी रिक्वेस्ट भेजकर झांसे से ओटीपी लेने के बाद ठगी करते हैं.

इतना ही नहीं ये लोग गूगल सर्चइंजन पर विभिन्न इलेक्ट्रोनिक एप्प के साईट पर जाकर उसमें भी अपना मोबाइल नंबर को ग्राहक अधिकारी के नंबर की जगह डाल देते हैं. कोई ग्राहक उस नंबर को ग्राहक सेवा अधिकारी का नंबर समझ कर डायल करते हैं और झांसे में आकर सभी जानकारी आधार नंबर आदि साझा कर देते हैं. इसके बाद उन नंबरों के लिंक खाते को वे लोग मिनटों में साफ कर देते हैं.

टीम व्यूवर, क्विक सपोर्ट जैसे रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल कराकर गूगल पर मोबाइल का पहला चार डिजिट नंबर सर्च करते हैं और खुद से छह डिजिट जोड़कर रेंडमली साइबर ठगी करते हैं. यूपीआइ वॉलेट से ठगी किये ग्राहकों को पुन: एकाउंट में रिफंड का झांसा देकर पीड़ित के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर में कुछ जोड़कर वर्चुअल फर्जी एकाउंट बनाने के बाद यूपीआइ पिन लॉगिन कराकर भी ठगी कर रहे हैं.

Posted By : Samir Ranjan.

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