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UPI वॉलेट से ठगी के शिकार पीड़ित को पैसे रिफंड दिलाने के नाम पर फिर की ठगी, देवघर से 12 साइबर क्रिमिनल गिरफ्तार

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news : 12 साइबर क्रिमिनल की गिरफ्तारी और उसके कारनामों के बारे में जानकारी देते देवघर एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा. साथ में अन्य पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद.
Jharkhand news : 12 साइबर क्रिमिनल की गिरफ्तारी और उसके कारनामों के बारे में जानकारी देते देवघर एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा. साथ में अन्य पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद.
प्रभात खबर.

Cyber crime in jharkhand, Deoghar news : देवघर (आशीष कुंदन) : साइबर क्रिमिनल का एक और नया कारनामा सामने आया है. अब UPI वॉलेट से ठगी के शिकार पीड़ित को रिफंड पैसे देने के नाम पर ठग लिया. इस संबंध में देवघर जिला अतर्गत सारठ थाना के पथरडा ओपी क्षेत्र के गोबरशाला एवं रंगामटिया गांव में छापेमारी कर 12 साइबर क्रिमिनल को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने इस साइबर क्रिमिनल के पास से 15 मोबाइल सहित 21 सिम कार्ड एवं 2 बाइक भी बरामद किया है. यह जानकारी एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा ने दी.

इस संबंध में एसपी श्री सिन्हा ने कहा कि गुप्त सूचना के आधार पर शुक्रवार को सारठ थाने के पथरडा ओपी क्षेत्र के गोबरशाला एवं रंगामटिया गांव में छापेमारी की गयी. मौके पर यूपीआई वॉलेट (UPI Wallet) से ठगी किये गये पीड़ित को दोबारा उसके खाते में रिफंड करने के नाम पर ठगी करने वाले 12 साइबर क्रिमिनल को गिरफ्तार किया गया.

गिरफ्तार साइबर क्रिमिनल में बभनकुंड गांव निवासी किशोर दास सहित गोबरशाला गांव निवासी कुंदन कुमार दास, राजेंद्र दास, महेश महरा, परशुराम दास, रंजीत महरा, पंकज कुमार दास, मुकुंद दास, रांगामटिया गांव निवासी चंदन कुमार दास, कुंदन कुमार दास, दिवाकर कुमार दास एवं सोनारायठाढ़ी थाना क्षेत्र के बिंझापिपरा गांव निवासी सुधीर कुमार दास शामिल हैं. पुलिस ने इनलोगों के पास से 15 मोबाइल सहित 21 सिमकार्ड एवं 2 बाइक बरामद किया है.

कैसे करते हैं ठगी

एसपी ने बताया कि पूछताछ में इनलोगों ने बताया कि ये लोग पीड़ित के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के साथ अन्य शब्द जोड़ कर एक नया वर्चुअल प्राइवेट एकाउंट बना कर उसे एक फर्जी एकाउंट के साथ लिंक कर लेते हैं. वहीं, पीड़ित को पेमेंट वॉलेट फोन-पे, भीम एवं यूपीआई के टू कंटेक्ट में जाकर यूपीएल पिन लॉगिन करने बोलते हैं और दोबारा ठगी कर लेते हैं. फर्जी मोबाइल नंबर से फर्जी बैंक अधिकारी बनकर आम लोगों को एटीएम बंद होने एवं चालू कराने का झांसा देकर ओटीपी की जानकारी लेकर ठगी किया जाता है.

इसके अलावा केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर आमलोगों से ओटीपी एवं आधार नंबर की जानकारी लेकर ठगी की जाती है. फोन-पे, पेटीएम में मनी रिक्वेस्ट भेजकर ओटीपी की जानकारी लेने के बाद ठगी की जाती है. गूगल पर विभिन्न प्रकार के वॉलेट, बैंकों के फर्जी कस्टमर केयर नंबर के स्थान पर अपना फर्जी मोबाइल नंबर कस्टमाइज कर विभिन्न हेल्पलाईन अधिकारी बनकर आमलोगों से सहायता के नाम से गुप्त जानकारी प्राप्त कर ठगी की जाती है. टीम व्यूवर एवं क्विक स्पोर्ट जैसे रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल करवाकर गूगल पर मोबाइल का पहला 4 डिजिट खोजकर कर अपने मन से 6 डिजिट नंबर जोड़ कर साइबर ठगी करते हैं.

Posted By : Samir Ranjan.

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