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Coronavirus Outbreak : झारखंड में कोरोना को मात देनेवाले दोबारा हो रहे संक्रमित, रिम्स के सीनियर डॉक्टर व पुलिसकर्मी फिर पॉजिटिव

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
झारखंड में कोरोना को मात देनेवाले दोबारा हो रहे संक्रमित
झारखंड में कोरोना को मात देनेवाले दोबारा हो रहे संक्रमित
Prabhat Khabar

राजीव पांडेय, रांची : झारखंड में कोरोना को मात देकर घर लौटनेवालों की रिपोर्ट दोबारा पॉजिटिव आ रही है. यह सबके लिए बड़ी चिंता की बात बन रही है. रिम्स के सीनियर डॉक्टर डॉ सीबी सहाय रिम्स के पेइंग वार्ड में 10 दिन से ज्यादा रहनेे के बाद रिपोर्ट निगेटिव आने पर घर चले अाये. एक सप्ताह बाद दोबारा जांच करायी, तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ गयी. इसके बाद दोबारा उनको आइसोलेशन में रहना पड़ा. तीसरी बार जब रिपोर्ट निगेटिव आयी, तो वह काम पर लौटे. वहीं प्लाज्मा दान करने के लिए 18 पुलिसकर्मी रिम्स ब्लड बैंक पहुंचे थे. जब उनकी जांच करायी गयी, तो दो पुलिस कर्मी पॉजिटिव आ गये.

इस मामले में विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में वायरस का ‘डेड सेल’ होने से ऐसा होता है. आरटीपीसीआर व ट्रूनेट जांच में यह कई बार पकड़ में आ जाता है. ऐसे में निगेटिव रिपोर्ट आने पर 15 दिनों तक खुद को आइसोलेशन में रखना चाहिए. आराम करने के साथ इम्युन सिस्टम को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए. अगर रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद व्यक्ति का बाहर निकलना शुरू हो जाता है, तो वह दोबारा संक्रमित हो सकता है या किसी अन्य संक्रमण की चपेट में आ सकता है.

रिम्स और निजी लैब में आ रहे ऐसे मामले : रिम्स और निजी लैब में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. रिम्स के ट्रूनेट विंग व माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एेसे दो से तीन केस मिले हैं, जिनकी निगेटिव रिपोर्ट के बाद दोबारा जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है. वहीं निजी जांच लैब में भी ऐसे केस देखने को मिल रहे हैं. सप्ताह में एक या दो सैंपल ऐसे मिल ही जा रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में वायरस के ‘डेड सेल’ रह जाने से ऐसा होता है. आरटीपीसीआर मशीन डेड सेल को भी पहचान लेता है, इसलिए ऐसा हो रहा है. सैंपल लेते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए. ऐसे में ज्यादा घबरानेवाली बात नहीं है, लेकिन निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद व्यक्ति को 15 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहना चाहिए.

डॉ पूजा सहाय, माइक्रोबाॅयोलॉजिस्ट

रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी कई बार शरीर में वायरस का आरएनए बचा रहता है. रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद 14 दिन तक विशेष ख्याल रखें. इम्युनिटी बढ़ाने का प्रयास करें. वैसे दोबारा पॉजिटिव होने पर भी वायरस का खतरनाक रूप नहीं देखने को मिल रहा है.

डॉ प्रदीप भट्टाचार्य, आइसीयू विशेषज्ञ रिम्स कोविड

16 को स्पेशल ड्राइव, एक लाख टेस्ट का लक्ष्य

रांची . 16 सितंबर को राज्य के 11 जिलों में सातवें चरण का रैपिड एंटीजेन टेस्ट ड्राइव चलाया जायेगा. एक ही दिन में इन जिलों में एक लाख टेस्ट कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. एनएचएम अभियान निदेशक रविशंकर शुक्ला ने इस संबंध में संबंधित जिलों को पत्र भेजकर तैयारी करने का निर्देश दिया है. अभियान निदेशक ने लिखा है कि कंटेनमेंट जोन और हॉटस्पॉट क्षेत्र के लोगों की विशेष रूप से जांच होगी.

पॉजिटिव केस के प्राइमरी व सेकेंडरी संपर्क की भी जांच करने की बात कही है. साथ ही घनी आबादी, स्लम क्षेत्र में रहनेवाले लोगों की भी जांच होगी. हाट बाजार, फल-सब्जी विक्रेता, रेस्टूरेंट, होटल स्टाफ की भी जांच करने का निर्देश दिया है. अस्पताल में कोविड कार्य में लगे कर्मियों, निगम के सफाई कर्मचारियों, कोविड ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों व 108 एंबुलेंस ड्राइवर व स्टाफ की जांच करनी है.

अभियान निदेशक ने लिखा है कि यह देखा गया है कि कंटेनमेंट जोन से बाहर और लो पॉजिटिव क्षेत्र में ज्यादा टेस्ट किये गये हैं. जो ड्राइव के लिए जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है. सिम्पटोमैटिक मरीज या पॉजिटिव केस के संपर्क वाले व्यक्ति के रैपिड एंटीजेन टेस्ट में निगेटिव रिपोर्ट आने के बावजूद उनकी जांच अनिवार्य रूप से आरटीपीसीआर या ट्रूनेट से करानी है.

कहां कितना कोरोना टेस्ट का लक्ष्य

जिला लक्ष्य

पूर्वी सिंहभूम 15000

रांची 15000

धनबाद 15000

कोडरमा 7500

रामगढ़ 7500

सरायकेला 7500

हजारीबाग 7500

बोकारो 7500

पसिंहभूम 7500

देवघर 5000

सिमडेगा 5000

कोरोना : टीकों ने जगायी उम्मीदें

1स्वदेशी वैक्सीन का जानवरों पर ट्रायल के अच्छे नतीजे : नयी दिल्ली. वैश्विक महामारी कोरोना से जारी जंग के बीच बड़ी संख्या में लोग संक्रमणमुक्त भी हो रहे हैं. देश में एक दिन में रिकॉर्ड 81 हजार से ज्यादा लोग इस महामारी से ठीक हुए हैं. हालांकि, इसी अवधि में 97 हजार से ज्यादा नये केस भी सामने आये हैं. इस बीच देश में विकसित हो रही भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ से जुड़ी अच्छी खबर सामने आयी है.

कोवैक्सीन’ का जानवरों पर ट्रायल सफल रहा है. कंपनी ने बताया कि ‘कोवैक्सीन’ के बंदर, चमगादड़ आदि जीव पर अध्ययन से इसकी प्रतिरक्षा क्षमता (इम्युनोजीनिसिटी) का पता चलता है. इस वैक्सीन ने बंदरों में वायरस के प्रति एंटीबॉडीज भी विकसित की है. भारत बायोटेक, आइसीएमआर के साथ मिल कर ‘कोवैक्सीन’को तैयार कर रहा है.

2. ऑक्सफोर्ड वैक्सीन का परीक्षण फिर हुआ शुरू : लंदन. ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी व दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल फिर से शुरू हो गया है. एक मरीज में टीका का दुष्प्रभाव सामने आने के बाद दुनियाभर में छह सितंबर को वैक्सीन के अंतिम चरण का ट्रायल रोक दिया गया था़ एस्ट्राजेनेका ने कहा कि ब्रिटेन की मेडिसिंस हेल्थ रेगुलेटरी अथॉरिटी ने जांच के बाद वैक्सीन को सुरक्षित पाया है.

भारत में भी इसका ट्रायल फिर से शुरू होने की उम्मीद है. सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा कि यदि ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया हमें परीक्षण को फिर से शुरू करने की अनुमति देता है, हम ट्रायल शुरू कर देंगे. दरअसल, ब्रिटेन में इस वैक्सीन के ट्रायल पर रोक के बाद भारत में भी इसको तैयार कर रही सीरम इंस्टीट्यूट ने ट्रायल रोकने का एलान िकया था.

पीएम ने किया सतर्क : जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना के प्रति लोगों को लापरवाही नहीं बरतने की सलाह देते हुए ‘जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं. दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी ‘का मंत्र दिया है. प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कोरोना महामारी के प्रति ढिलाई नहीं बरतने की सलाह दी.

चीनी वैज्ञानिक का दावा : वुहान के लैब में तैयार हुआ कोरोना वायरस : कोरोना वायरस को लेकर चीन की महिला वैज्ञानिक लि-मेंग यान ने अपनी सरकार को घेरा है. उन्होंने दावा किया कि कोरोना वुहान के मीट मार्केट से नहीं, वुहान के लैब से आया है. यह मानव निर्मित वायरस है. इसका जीनोम अनुक्रम एक मानव फिंगर प्रिंट की तरह है

Post by : Pritish Sahay

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