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Corona Effect : दुधारू पशुओं के चारे पर आफत, तीन दिन दूध नहीं खरीदेगा झारखंड मिल्क फेडरेशन

By Pritish Sahay
Updated Date

रांची : लॉकडाउन से राज्य के पशुपालक भी परेशानी में हैं. जानवरों के लिए चारा कम हो गयी है. अगर कहीं मिल रहा है, तो भारी कीमत वसूली जा रही है. इधर, झारखंड राज्य मिल्क फेडरेशन के दूध (मेधा) की मांग में गिरावट (35 हजार लीटर प्रति दिन) आ गयी है. इसे लेकर फेडरेशन ने 27 से 29 मार्च को दूध नहीं उठाने का फैसला लिया है.जानवरों को चारा की दिक्कत नहीं हो, इसके लिए कृषि सचिव पूजा सिंघल ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखा है. सचिव पूजा सिंघल ने सभी उपायुक्तों को पत्र लिखकर राज्य में पशु चारा उपलब्धता सुनिश्चित करने का आदेश दिया है. श्रीमती सिंघल ने लिखा है कि यहां चारा पड़ोसी राज्यों से आता है. ऐसी कोशिश करें कि झारखंड में सुगमता से पशु चारा आता रहे. जिससे पशुपालकों को परेशानी नहीं हो.

तीन गुनी कीमत देने के बाद भी नहीं मिल रहा चारा : जानवर पालकों के सामने परेशानी यह है कि तीन गुनी कीमत भुगतान करने पर ही कुछ स्थानों से कुट्टी और चोकर मिल रहे हैं. इसके अतिरिक्त जानवरों को अन्य जरूरी सामान उपलब्ध भी नहीं हो रहे हैं. ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों के साथ-साथ शहरी इलाकों के खटाल वालों के समक्ष संकट की घड़ी आ गयी है. कांके, टाटीसिलवे, रातू रोड, नामकुम, चुटिया आदि में जानवरों के खाने के सामान का कारोबार करने वालों के यहां पशुपालकों की भीड़ लगी रही. बुधवार को पांच रुपये प्रति किलो मिलने वाले कुट्टी के लिए 18 से 20 रुपये किलो तक वसूले गये. इसमें भी राशनिंग की जा रही थी. इसी तरह आम तौर पर 22 से 25 रुपये किलो मिलने वाला चोकर 40 रुपये में बेचा गया.

कांके के एक पशुपालक ने बताया कि पशुओं को चारा नहीं मिलने से आनेवाले समय में काफी संकट हो जायेगा. पशु बिना चारे के नहीं रह सकते हैं. इस पर भी प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है. केंद्र ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर जानवरों को होने वाली परेशानी पर भी गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है.

उत्पादन क्षमता 1.35 लाख लीटर, मांग हो रही 35 हजार लीटर : मिल्क फेडरेशन के प्रबंध निदेशक सुधीर कुमार सिंह ने सभी दूध उत्पादकों को पत्र लिखा है. इसमें कहा है कि लॉक डाउन के कारण दूध की मांग घट गयी है. प्रतिदिन करीब 35 हजार लीटर दूध की मांग हो रही है. उत्पादन क्षमता 1.35 लाख लीटर प्रतिदिन है. इस कारण डेयरियों में करीब चार लाख लीटर दूध का संग्रह हो गया है.

वाहनों में भी दूध भरा हुआ है. रांची में उपलब्ध प्राइवेट पाउडर दूध प्लांट भी मदद नहीं कर पा रहा है. छत्तीसगढ़ के एक निजी डेयरी से पाउडर बनाने की बात हुई थी. वहां भी गाड़ी खड़ी है. इस कारण प्रबंधन ने तय किया है कि 29 मार्च की शाम तक फेडरेशन दुग्ध का संग्रहण नहीं करेगा. प्लांट में उपलब्ध दूध के वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार हो रहा है.

खूंटी का डेयरी उद्योग भी संकट में

लॉक डाउन की वजह से खूंटी शहर के डेयरी उद्योग पर भी बुरा असर पड़ रहा है़ मवेशियों के चारा पर आफत आ गयी है़ दूसरे जिले से चारा नहीं पहुंच पा रहा है. कुछ सप्लायर रिस्क लेकर चारा पहुंचा रहे हैं. कीमत दोगुनी हो गयी है, जिससे डेयरी संचालकों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है़ दुलुआ स्थित डॉक्टर डेयरी की संचालिका नूतन सांगा ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से चारा की दिक्कत होने लगी है़ महंगा होने के कारण लागत बढ़ गयी है. हालांकि दूध की बिक्री में परेशानी नहीं हो रही है़ दूध सभी ग्राहकों के घर तक पहुंचाया जा रहा है.

डोरंडा में पशु आहार की होम डिलिवरी

एसएसपी अनीश गुप्ता की पहल पर गुरुवार की सुबह डोरंडा के विभिन्न मुहल्लों में पशु आहार, फल, सब्जी, किराना सामान और डेयरी उत्पाद की होम डिलिवरी शुरू हुई. एसएसपी के निर्देश पर डोरंडा थाना प्रभारी ने डोरंडा बाजार समिति के लिए 31 ऑटो की व्यवस्था की. इसमें सामान लेकर विक्रेता विभिन्न मुहल्लों में जा रहे हैं. इसके लिए डोरंडा थानेदार ने सूची भी तैयार की है, ताकि सामान पहुंचाने के दौरान उन्हें असुविधा न हो. नयी व्यवस्था शुरू होने से गुरुवार को डोरंडा बाजार में भीड़ कम नजर आयी. इन ऑटो चालकों को मास्क और सेनेटाइजर दिये गये हैं. थाना प्रभारी ने बताया कि वह अपनी निगरानी में होम डिलिवरी करवा रहे हैं.

मेसरा में डेयरी की स्थिति चरमरायी

मेसरा इलाके के डेयरियों की स्थिति चरमराने लगी है.दूध बिक्री से लेकर पशु चारा (कुटी) नहीं िमल रहे हैं. विकास विद्यालय डेयरी, नेवरी में 150 गाय, कल्याणी बस्ती स्थित अजय डेयरी में 150 गाय, मेसरा स्थित पंजाब स्वीट डेयरी में 150 गाय, मेसरा स्थित दयाल खटाल में 100 गाय और भूषण डेयरी में 10 गाय के अलावा यहां के छोटे-छोटे लगभग 20 गोपालकों की स्थिति चिंताजनक है. उदय मिष्ठान डेयरी के संचालक रवि शंकर गुईं ने बताया कि बिहार व बंगाल से पशु चारा आता था.परंतु अब मजदूर घर से नहीं निकल रहे हैं. साथ ही राज्यों की सीमाएं सील कर दी गयी हैं. इधर विकास विद्यालय के प्राचार्य पीएस कालरा ने मुखिया व जेएसएलपीएस की दीदियों से आग्रह किया है कि वह अपने पंचायत सचिवालय में दूध व पनीर की बिक्री केंद्र स्थापित करें.

इटकी के सब्जी उत्पादक और गोपालक परेशान

इटकी क्षेत्र में पशु चारा के साथ सब्जी व्यापारियों की भी कमी हो गयी है. होटलों के बंद रहने से दुग्ध उत्पादक किसानों को गायों का पेट पालना व आवागमन ठप होने से सब्जी उत्पादक किसानों को मुश्किल हो रही है. इटकी क्षेत्र सब्जी उत्पादन में अग्रणी है. गोपालकों के अथक प्रयास से क्षेत्र की पहचान दूध उत्पादक के रूप में भी उभरी है. यहां से सब्जी के अलावा काफी दूध रांची सहित अन्य शहरों व राज्यों में भेजी जाती है. पशु चारा की कमी और मूल्यों में भी बढ़ोतरी हुई है. इटकी स्टेशन रोड के एक गोपालक हीरा यादव का कहना है कि लॉकडाउन के कारण गोपालक किसान दोहरी मार से परेशान हैं.

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