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कोरोना संक्रमण का असर झारखंड में मछली कारोबार पर भी पड़ा, मछली की कम बिक्री होने से चतरा में इटखोरी के कई मछुआरे हुए बेरोजगार

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
रंजीत रविदास, मंटू पासवान, रुदन भुइयां (ऊपर) व सन्नी केवट, सोनू केवट, झमन रविदास (नीचे).
रंजीत रविदास, मंटू पासवान, रुदन भुइयां (ऊपर) व सन्नी केवट, सोनू केवट, झमन रविदास (नीचे).
प्रभात खबर.

Jharkhand Mini Lockdown Impact (इटखोरी, चतरा) : वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बाजार की उत्पन्न स्थिति का असर मछली कारोबार पर भी पड़ा है. इसका खामियाजा मत्स्य उत्पादकों, विक्रेताओं व मछुआरों को भोगना पड़ रहा है. इस व्यापार से जुड़े लोगों को करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. बाजार में मांग नहीं होने के कारण इन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा है, दूसरी ओर मछली की बिक्री कम होने के कारण मछुआरे भी बेरोजगार हो गये हैं. इनके समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है.

इटखोरी के एमबीके मत्स्य पालन सहयोग समिति के सचिव रंजीत रविदास ने कहा कि कोरोना के कारण मछली बिक्री काफी प्रभावित हुआ है. खुद 5 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. कहते हैं कि रोजाना दो क्विंटल मछली बेचते थे, लेकिन अभी तो कुछ नहीं बिक रहा है. हमारे सभी मजदूर घर चले गये जिससे डैम में मछली नहीं पकड़ रहे हैं. इसके अलावा रहा-सहा कसर चक्रवाती तूफान ने पूरा कर दिया. चक्रवाती तूफान के कारण केज उड़कर बरबाद हो गया. इससे 10 से 20 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा है.

मंटू पासवान ने कहा कि गांवों में घूम-घूम कर मछली बेचता था. पिछले एक माह से घर में हूं. बक्सा डैम में मछली पकड़ने का काम बंद है. इसलिए मेरा धंधा भी बंद हो गया है. रोजाना 50-60 किलो मछली बेचकर एक हजार रुपये कमाते थे. अब तो घर-परिवार चलाना मुश्किल हो गया है.

वहीं, मछुआरा रुदन भुइयां ने कहा कि कोरोना की डर से घर में हैं. जान बचेगा तभी कमायेंगे. बाजार खुलते ही मछली पकड़ने का काम शुरू करेंगे. सन्नी केवट ने कहा कि कोरोना के कारण बाजार में मछली की मांग नहीं है. पहले 80 किलो प्रतिदिन बेचते थे, लेकिन अभी मात्र 20 किलो बिकता है. 8000 रुपये की जगह 2000 रुपये का बिक्री होता है. जबतक बाजार दिनभर नहीं खुलेगा तबतक बिक्री नहीं बढ़ेगी.

सोनू केवट ने कहा कि मछली का डिमांड नहीं है. 70 किलो के जगह 15 किलो मछली बिकता है. किसी तरह समय गुजार रहे हैं. लोग घर से निकलते नहीं हैं, तो डिमांड कैसे बढ़ेगा. बक्सा डैम पर मछली का कटिंग कर गुजारा करने वाले झमन रविदास ने कहा कि डैम पर मछली खरीदने वालों से कटिंग करने के एवज में एक हजार रुपये रोजाना कमाते थे, लेकिन अब बेरोजगार हो गये हैं. खरीदार नहीं आ रहे हैं.

Posted By : Samir Ranjan.

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