Chaibasa News : अकेला हाथी ने तीन माह में 25 ग्रामीणों को मार डाला, तीन राज्यों की टीम नहीं कर पा रही काबू

जिले में हाथी प्रभावित क्षेत्र के लोगों की दिन का चैन व रातों की नींद उड़ी

चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिले में बीते तीन माह से एक हाथी गांवों में ‘यमराज’ बनकर घूम रहा है. जिले का आधा दर्जन प्रखंड के लोग दहशत के साये में जीवन-यापन को विवश हैं. वहीं, वन विभाग की टीम उक्त दंतैल हाथी को पकड़ने में नाकाम रही है. ग्रामीणों ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाया है. जिले में 1 जनवरी से 31 मार्च (2026) तक हाथी के हमले में कुल 25 ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं. मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है. औसतन हर सप्ताह दो ग्रामीण की मौत हो रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग के पास हाथियों को खदेड़ने की कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है.

जनवरी और मार्च महीने 
में हुईं सर्वाधिक घटनाएं

उक्त दंतैल हाथी ने जनवरी व मार्च में सबसे अधिक ग्रामीणों की जान ली है. 6 जनवरी को नोवामुंडी और हाटगम्हरिया में हाथी ने सात लोगों को मार डाला था. इसमें एक ही परिवार के पति-पत्नी और दो मासूम बच्चे शामिल थे. वहीं, 9 जनवरी को मझगांव के तिलोकुटी गांव में एक बच्चे और प्रकाश मालुवा की जान गयी. वहीं, गोइलकेरा के सोवा गांव में 6 वर्षीय कुंदरा और महज 8 माह की सामू बाहदा को हाथी ने बेरहमी से कुचल दिया. हाल में 25 मार्च को मंझारी के रोलाडीह निवासी 56 वर्षीय सुशील बिरुवा जंगल में केंदू पत्ता चुनने गये था. हाथी ने कुचलकर मार डाला था.

अकेला दंतैल हाथी बना काल
बदल ले रहा जगह : विभाग

वन विभाग के अनुसार, जिले के विभिन्न प्रखंडों में तबाही मचाने वाला हाथियों का झुंड नहीं, बल्कि एक अकेला दंतैल हाथी है. झुंड से बिछड़ा यह हाथी अत्यंत हिंसक और आक्रामक हो चुका है. इसने मुख्य रूप से टोंटो, हाटगम्हरिया, नोवामुंडी, झींकपानी, मंझारी, गोइलकेरा, मनोहरपुर और मझगांव प्रखंडों को अपना निशाना बनाया है. यह हाथी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है और रात के अंधेरे में रिहायशी इलाकों में घुसकर झोपड़ियों और घरों को ध्वस्त कर रहा है.

हर बार चकमा दे रहा हाथी :

हाथी की सटीक लोकेशन नहीं मिल पाने के कारण वन विभाग के तमाम प्रयास अब तक विफल साबित हुए हैं. वर्तमान में हाथी को ट्रैक करने के लिए पश्चिम बंगाल (बांकुड़ा) की विशेषज्ञ टीम, जमशेदपुर (दलमा) की रेस्क्यू टीम और ओडिशा वाइल्ड लाइफ की टीम संयुक्त रूप से जुटी हुई है. विभाग रात-दिन कैंप लगाकर जंगलों में तलाशी ले रहा है, लेकिन हाथी हर बार चकमा देकर भाग निकलने में सफल हो जा रहा है.

आजीविका पर संकट 
ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ा

हाथियों के आतंक के कारण ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी गुस्सा है. लोग अब जलावन की लकड़ी और वनोपज (केंदू पत्ता, दातुन) इकट्ठा करने के लिए जंगल जाने से कतरा रहे हैं, जिससे उनकी दैनिक आजीविका पर गहरा संकट मंडरा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग के पास हाथियों को खदेड़ने की कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है.

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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