चाईबासा. चाईबासा के पुलहातु स्थित कुड़ुख सामुदायिक भवन में गुरुवार को उरांव समाज रक्तदान समूह की बैठक हुई. इसमें जिले के ब्लड बैंक की वर्तमान स्थिति और रक्त की किल्लत पर चिंता व्यक्त की गयी. समूह के मुख्य संचालक और ””””ब्लडमैन”””” के नाम से चर्चित लालू कुजूर ने कहा कि चाईबासा ब्लड बैंक की व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है, इसका सीधा खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है. बैठक में सदस्यों ने बताया कि पहले चाईबासा ब्लड बैंक से प्रतिदिन 30 से 40 यूनिट ब्लड का आदान-प्रदान सुचारू रूप से होता था. लेकिन जब से ब्लड बैंक में एचआईवी संक्रमण से संबंधित खबरें सामने आयी हैं, तब से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गयी है. स्थिति यह है कि स्थानीय स्तर पर डोनर तैयार रहने के बावजूद मरीजों को रक्त नहीं मिल रहा है. मजबूरन परिजनों को रक्त के लिए सरायकेला और जमशेदपुर तक भटकना पड़ रहा है, फिर भी समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है.
जमशेदपुर भेज दिया जाता है चाईबासा का रक्त:
समूह के सदस्यों ने कहा कि यदि कोई संस्था चाईबासा में रक्तदान शिविर आयोजित करती है, तो एकत्रित रक्त को जमशेदपुर भेज दिया जाता है. जरूरत पड़ने पर उसी अनुपात में ब्लड वापस नहीं मिलता. कई बार तो स्थिति इतनी विकट हो जाती है कि संबंधित रक्तदान समूह को अपने ही डोनर द्वारा दिया गया रक्त भी उपलब्ध नहीं कराया जाता. चाईबासा ब्लड बैंक में लेन-देन की प्रक्रिया फिलहाल लगभग ठप है. उरांव समाज रक्तदान समूह अब तक लगभग 3000 जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराकर उनकी जान बचा चुका है. समूह प्रतिदिन औसतन 1 से 6 यूनिट ब्लड की व्यवस्था करता है. इस मौके पर सक्रिय रक्तदाता सुमित बरहा, बिष्णु मिंज, किशन बरहा, इशू टोप्पो, विक्रम खलखो, अनिल बरहा, सौरव मिंज और बबलू कुजूर उपस्थित थे.समूह के सदस्यों की मुख्य मांगें
– चाईबासा ब्लड बैंक को पहले की तरह सक्रिय किया जाये. – जमशेदपुर की तर्ज पर चाईबासा में भी आधुनिक सुविधाएं और जांच उपकरण उपलब्ध कराये जायें.– चाईबासा में संग्रहित रक्त का प्राथमिक लाभ यहीं के मरीजों को मिलना सुनिश्चित हो.
