Chaibasa News : भागलपुर-बलिता गांव: जान जोखिम में डाल पार कर रहे पटरी, एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं

हर सुबह पटरी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं बच्चे, तीखा मोड़ होने से हमेशा बना रहता है जान का खतरा

बड़बिल. विकास के दावों के बीच चक्रधरपुर रेल मंडल की बिरकेला पंचायत के दो गांव भागलपुर और बलिता आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. आजादी के दशकों बाद भी इन गांवों के लिए पक्की सड़क एक सपना बनी हुई है. आलम यह है कि ग्रामीणों को पंचायत मुख्यालय या बिलाइपदा बाजार जाने के लिए हर दिन जान जोखिम में डालकर बिना फाटक वाली रेल पटरी पार करनी पड़ती है.

10 साल में सैकड़ों दुर्घटनाएं, फिर भी रेलवे मौन:

जिस रेल मार्ग से स्कूली बच्चे और ग्रामीण हर दिन गुजरते हैं, वहां न तो कोई रेलवे फाटक है और न ही अंडरपास. तीखा मोड़ होने के कारण तेज रफ्तार ट्रेन का पता तब चलता है जब वह बिल्कुल करीब आ जाती है. ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में इस ट्रैक पर छोटी-बड़ी सैकड़ों दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. विडंबना यह है कि सुरक्षा के नाम पर रेलवे विभाग अक्सर यहां लोहे के पिलर गाड़ देता है, जिससे गांव में एंबुलेंस तक का प्रवेश बंद हो जाता है. ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद ही इन अवरोधों को हटाया जाता है. पंचायत प्रतिनिधियों ने कई बार चक्रधरपुर के डीआरएम को लिखित रूप में इस समस्या से अवगत कराया है. लेकिन आश्वासन के अलावा धरातल पर कुछ नहीं बदला है.इस संबंध में सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने कहा कि कई स्थानों पर लोग अवैध तरीके से ट्रैक पार करते हैं. सही स्थान का जायजा लेने के लिए बुधवार को जांच टीम जायेगी. वहां पहुंचकर मामले की जानकारी लेगी.

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जोखिम भरा सफर:

गांव के छोटे-छोटे बच्चे हर सुबह इसी असुरक्षित पटरी को पार कर बिलाइपदा के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं.

एंबुलेंस के लिए रास्ता नहीं:

पक्की सड़क के अभाव और रेलवे के अवरोधों के कारण आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है.

स्टेशन जाने को पगडंडी का सहारा:

मुर्गा महादेव रोड स्टेशन का उद्घाटन 2009 में हुआ था, लेकिन आश्चर्य की बात है कि स्टेशन तक पहुंचने के लिए आज भी कोई वैध सड़क नहीं है. यात्रियों को खेतों और पगडंडियों के सहारे पटरी पार कर अवैध तरीके से स्टेशन पहुंचना पड़ता है.

छह करोड़ का मासिक राजस्व पर सुविधा शून्य:

रेलवे की अनदेखी इसलिए भी चुभती है क्योंकि यह क्षेत्र विभाग को भारी मुनाफा दे रहा है.

मालगाड़ी से कमाई:

कंपनियों की निजी साइडिंग से हर महीने लगभग 25 मालगाड़ियां गुजरती हैं, जिससे रेलवे को प्रतिमाह 6 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है.

यात्री आय:

बड़बिल-पुरी इंटरसिटी में प्रतिदिन यहां से कई यात्री सफर करते हैं. इतना राजस्व के बावजूद रेलवे ने एक सुरक्षित अंडरपास या फाटक निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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