Bokaro News : भूमि लीज व सब-लीज नवीनीकरण के लिए सेल की नयी नीति लागू

Bokaro News : भूमि लीज व सब-लीज नवीनीकरण के लिए सेल की नयी नीति लागू हो गयी है.

बीएसएल की टाउनशिप में संचालित हजारों दुकानों, स्कूलों, कॉलेजों, बैंकों, सरकारी संस्थानों, धार्मिक स्थलों, सामाजिक संगठनों व

लीजधारकों के लिए राहत

की खबर है. भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड-सेल ने 15 मई 2026 से भूमि लीज और सब-लीज नवीनीकरण के लिए नयी नीति

लागू कर दी है. इसके तहत मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, श्मशान, कब्रिस्तान, महिला समितियों, कर्मचारी संघों व कई चैरिटेबल संस्थाओं का लीज नवीनीकरण मात्र एक रुपये की टोकन राशि में होगा. इंप्लाई हाउसिंग यानी को-ऑपरेटिव सोसाइटी को राहत

दी गयी है. इस नीति

से बीएसएल सहित भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर, इस्को स्टील प्लांट-बर्नपुर और सेल की अन्य इकाइयों पर भी असर पड़ेगा.

अब स्थानीय स्तर पर नयी नीति

का क्रियान्वयन होगा. यदि संयंत्र प्रबंधन समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी करता है, तो बोकारो में वर्षों से अटके 1100 से अधिक प्लाॅट के लीज नवीनीकरण के मामलों का समाधान संभव हो सकेगा. सेल को भी लंबित राजस्व की प्राप्ति होगी. लीज नवीनीकरण की राशि को लेकर बोकारो के प्लॉटधारी, स्कूल, धार्मिक स्थल व अन्य गये कोर्ट गये थे.

बीएसएल सहित सेल के विभिन्न संयंत्रों में बड़ी संख्या में ऐसी लीज थीं, जिनकी अवधि वर्षों पहले समाप्त हो चुकी थी. पुरानी नीति

के कारण लीज नवीनीकरण, प्रीमियम, ब्याज और अन्य शुल्कों को लेकर विवाद चल रहे थे. कई मामलों में बकाया राशि इतनी बढ़ गयी थी कि संस्था व लीजधारी भुगतान करने की स्थिति में नहीं थे. लीज नवीनीकरण नहीं कराने के कारण कई प्लॉट को निरस्त करने की प्रक्रिया भी चल रही थी.

इन पर लागू होगी नयी नीति

नयी नीति

केवल पुरानी लीज और सब-लीज के नवीनीकरण पर लागू होगी. जिनकी लीज 15 मई 2026 से पहले समाप्त हो चुकी है व जिनकी लीज भविष्य में समाप्त होने वाली है, उन पर नयी नीति

लागू होगी. यह नयी नीति

नयी लीज आवंटन पर लागू नहीं होगी.

लीजधारकों की हैं तीन श्रेणियों

लीजधारकों की

तीन श्रेणियां हैं. श्रेणी-1 में व्यावसायिक संस्थान- निजी दुकानें, दुकान-सह-आवास, पेट्रोल पंप, सिनेमा हॉल, बैंक, एटीएम, बीमा कंपनियां, केंद्रीय और राज्य सार्वजनिक उपक्रम शामिल हैं. श्रेणी-2 में सरकारी एवं गैर-व्यावसायिक संस्थान-आयकर विभाग, इएसआइसी, सीआइएसएफ, डाकघर, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, नगर निगम, कर्मचारी सहकारी आवास समितियां, स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक संस्थान, आइसीएआइ, आइसीएमएआइ जैसे पेशेवर संगठन शामिल हैं. श्रेणी-3 में धार्मिक, सामाजिक और चैरिटेबल संस्थान- मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, रामकृष्ण मिशन, ब्रह्माकुमारी, अरविंद सोसाइटी, पुस्तकालय, चैरिटेबल

स्कूल व अस्पताल, दिव्यांग विद्यालय, महिला समितियां, कर्मचारी संगठन शामिल हैं. व्यावसायिक संस्थानों, दुकानदारों व अन्य व्यवसायिक संस्थानों को भूमि के वर्तमान मूल्य का 25 प्रतिशत नवीनीकरण शुल्क देना होगा. सरकारी एवं शैक्षणिक संस्थाओं को भूमि मूल्य का 10 प्रतिशत नवीनीकरण शुल्क देना होगा. धार्मिक व सामाजिक संस्था सिर्फ एक रुपया टोकन राशि देकर लीज नवीनीकरण करा सकेंगे. हालांकि, इनको भी सिक्योरिटी डिपॉजिट, वार्षिक ग्राउंड रेंट व सर्विस चार्ज देना होगा.

स्कूल-कॉलेज की आय उसके खर्च से 15% अधिक है, तो उसे अगली उच्च श्रेणी के अनुसार शुल्क

नयी नीति

में एक महत्वपूर्ण प्रावधान रखा गया है कि यदि कोई स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्था या ट्रस्ट पिछले पांच वर्षों में औसतन 50 लाख रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय अर्जित कर रहा है और आय उसके खर्च से 15% अधिक है, तो उसे अगली उच्च श्रेणी के अनुसार शुल्क देना पड़ सकता है. इसकी समीक्षा हर पांच वर्ष में होगी.

खाली जमीन रखने वालों को राहत

यदि किसी संस्था को बड़ी जमीन आवंटित की गयी है. लेकिन, निर्माण 50% से कम क्षेत्र में हुआ है, तो उसे पूरी जमीन का शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होगी. ऐसी स्थिति में निर्मित क्षेत्र के 1.5 गुना हिस्से पर नियमित शुल्क लगेगा. शेष जमीन पर “राइट टू यूज” मिलेगा. उस पर केवल वार्षिक ग्राउंड रेंट और सर्विस चार्ज देना होगा.

पुराने मामलों के लिए आम माफी योजना से राहत

नयी नीति

में एक प्रकार की वन-टाइम एमनेस्टी (आम माफी) योजना दी है. यदि एक वर्ष के भीतर नवीनीकरण करा लिया तो इसका लाभ मिलेगा. केवल नवीनीकरण शुल्क पर एसबीआइ कैश क्रेडिट दर से साधारण ब्याज लगेगा. कोई दंडात्मक ब्याज नहीं लगेगा.

पुराने बकाये पर पेनल्टी माफ होगी. यदि एक वर्ष बाद नवीनीकरण कराया गया तो लाभ मिलेगा.

सीजीएम स्तर के अधिकारियों की स्थायी समिति बनेगी

बीएसएल सहित प्रत्येक संयंत्र में

तीन सीजीएम स्तर के अधिकारियों की एक स्थायी समिति बनायी जायेगी. यह समिति तय करेगी कि संस्था किस श्रेणी में आती है. जमीन का वास्तविक उपयोग क्या है. श्रेणी बदलनी है या नहीं. अंतिम स्वीकृति संबंधित फंक्शनल डायरेक्टर देंगे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >